उनवल के मां दुर्गा मंदिर से जुड़ा 1883 का विवाद, शारदीय नवरात्र में उमड़ रही भक्तों की भीड़
गोरखपुर : उनवल, नगर पंचायत कस्बा संग्रामपुर उनवल के नई बाजार स्थित प्राचीन मां दुर्गा मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सुबह चार बजे से ही भक्त दर्शन-पूजन के लिए पहुंचने लगते हैं। मां के जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय बना हुआ है। करीब 350 वर्ष पुराना ना जाने वाला यह मंदिर उनवल की धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। स्थानीय स्तर पर प्रचलित विवरणों के अनुसार, पुराने समय में बांसगांव के श्रीनेत वंशीय क्षत्रियों का उनवल स्टेट के महल में स्थापित मां की पिंडी से जुड़ाव बताया जाता है। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, वर्ष 1883 में बलि की परंपरा को लेकर उनवल और बांसगांव के लोगों के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद मां की एक पिंडी बांसगांव ले जाए जाने का उल्लेख भी स्थानीय परंपरा में मिलता है। बांसगांव में शारदीय नवरात्र की नवमी पर स्वार्पण की परंपरा निभाए जाने की बात कही जाती है। हालांकि, इस घटनाक्रम की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि के लिए प्रमाणिक दस्तावेजों की आवश्यकता है। उनका परिवार तीन पीढ़ियों से मां की पूजा-अर्चना और सेवा करता आ रहा है। स्थानीय श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है। भक्त शिवकुमार महदेशिया बचपन से मंदिर में दर्शन करने आते हैं, जबकि अजय कुमार पांडेय करीब 15 वर्षों से प्रत्येक नवरात्र में मां के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। श्रद्धालु शुभम महदेशिया ने भी मां के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की।नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। दूर-दराज से पहुंच रहे भक्तों के कारण मंदिर परिसर में दिनभर चहल-पहल बनी रहती है।उनवल का यह प्राचीन मंदिर धार्मिक आस्था और स्थानीय विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है।