रजिस्ट्री होते ही संपत्ति का नामांतरण
गोरखपुर : प्रदेश में मकान या जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने और दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके लिए ऑटो म्यूटेशन यानी स्वत: नामांतरण व्यवस्था लागू की जाएगी। रजिस्ट्री होते ही पंजीकृत दस्तावेजों का विवरण संबंधित विभागों तक ऑनलाइन पहुंचेगा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत संपत्ति के रिकॉर्ड में नए स्वामी का नाम दर्ज करने की कार्रवाई शुरू हो सकेगी। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए नगर विकास, राजस्व, आवास और औद्योगिक विकास विभाग अपने-अपने क्षेत्र की संपत्तियों के मान्य स्वामित्व अभिलेख चिह्नित करेंगे और सॉफ्टवेयर के जरिए विभागीय रिकॉर्ड को आपस में जोड़ेंगे। तैयारियों को लेकर 26 अक्तूबर को पूर्वाह्न 11 बजे मुख्य सचिव सभागार लोकभवन में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित होगी। बैठक में 27 जुलाई को हुई बैठक के कार्यवृत्त की अनुपालन आख्या भी प्रस्तुत होगी। फिलहाल प्रदेश के 75 जिला मुख्यालयों के नगर निकायों में 34.70 लाख संपत्तियां ई-नगरसेवा पोर्टल पर दर्ज हो चुकी हैं। इन संपत्तियों की 17 अंकों की यूनिक प्रॉपर्टी आईडी बनाई जा रही है। वहीं, नेशनल जियोस्पेशियल नॉलेज-बेस्ड लैंड सर्वे ऑफ अर्बन हैबिटेशन (नक्शा) परियोजना के तहत नगरीय संपत्तियों के लिए यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करने के लिए गोरखपुर नगर निगम समेत 10 निकायों को पायलट के तौर पर चुना गया है। उत्तर प्रदेश शासन के अनु सचिव चन्द्रपाल सिंह ने नक्शा परियोजना के नोडल अधिकारियों को 26 अक्तूबर की बैठक का पत्र भेजा है। बैठक में नगर विकास विभाग उन जिला मुख्यालयों के नगर निकायों में दोनों यूनिक प्रॉपर्टी आईडी के बीच संबंध स्पष्ट करेगा, जो ई-नगरसेवा और नक्शा दोनों परियोजनाओं में शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि के लिए खसरा संख्या आधारित यूनिक प्रॉपर्टी आईडी और आबादी की जमीन के लिए 13 अंकों की घरौनी को मान्य अभिलेख के रूप में चिह्नित किया गया है। बैठक में नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन और औद्योगिक विकास विभाग को भी अपने क्षेत्राधिकार की संपत्तियों के विक्रय के अधिकार को प्रथम दृष्टया प्रमाणित करने वाले मान्य दस्तावेज चिह्नित करने होंगे। अभिलेखों के ऑनलाइन प्रमाणीकरण, अद्यतन और एकीकरण की प्रक्रिया तय करने के लिए महानिरीक्षक निबंधन की अध्यक्षता में समिति गठित होगी। इसमें राजस्व विभाग के सक्षम अधिकारी भी शामिल होंगे। समिति अपनी रिपोर्ट राजस्व परिषद को सौंपेगी, जिसके बाद राजस्व विभाग मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करेगा। अन्य विभागों को भी अपने स्तर पर एसओपी बनाने का निर्देश है। ऑटो म्यूटेशन लागू करने के लिए राजस्व विभाग कुछ राजस्व ग्रामों, नगर विकास विभाग कम से कम एक नगर निकाय, आवास विभाग कम से कम एक विकास प्राधिकरण और औद्योगिक विकास विभाग किसी उपयुक्त औद्योगिक विकास प्राधिकरण का चयन करेगा। चयनित संस्थाओं को स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग से एपीआई के माध्यम से जोड़ा जाएगा, ताकि रजिस्ट्री के जरूरी विवरण संबंधित विभागों को स्वत: उपलब्ध हो सकें। राजस्व विभाग से मध्य प्रदेश की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में साइबर तहसील व्यवस्था लागू करने की संभावनाओं और राजस्व संहिता की धारा 34 के तहत नामांतरण की प्रक्रिया एवं समयसीमा की समीक्षा पर जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश हैं। इससे नामांतरण के मामलों का शीघ्र निस्तारण करने और भविष्य में स्वत: नामांतरण व्यवस्था लागू करने का रास्ता तैयार होगा।