गोरखपुर : गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज की 57वीं और राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में 24 से 30 सितंबर तक सप्तदिवसीय श्रद्धांजलि समारोह आयोजित होगा। इसके तहत 23 सितंबर से साप्ताहिक संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ होगा। वृंदावन के रेवासा धाम से पधारे श्रीमद्भगद्गुरु द्वाराचार्य, अग्रपीठाधीश्वर एवं मलूकपीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य कथा सुनाएंगे। गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने बताया कि दोनों ब्रह्मलीन महंतों ने धर्म, संस्कृति, शिक्षा, समाज और राष्ट्र के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बहुआयामी योगदान दिया। वर्ष 1920 से 21वीं शताब्दी के प्रथम दशक तक देश की राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक समस्याओं पर दोनों महंतों ने अपनी प्रभावशाली भूमिका निभाई। वे आध्यात्मिक-सामाजिक पुनर्जागरण के अग्रदूत और पूर्वी उत्तर प्रदेश में शैक्षिक पुनर्जागरण के प्रमुख वाहक के रूप में प्रति 24 सितंबर से शुरू होने वाले सम्मेलनों में 24 को ‘भारतीय ज्ञान परंपरा का वर्तमान परिप्रेक्ष्य’, 25 को ‘नशा नाश का कारण है’, 26 को ‘लोकतंत्र की जननी है भारत’, 27 को ‘संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति’ और 28 सितंबर को ‘भारतीय संस्कृति एवं गो-सेवा’ विषय पर चर्चा होगी। 29 सितंबर को महंत दिग्विजयनाथ तथा 30 सितंबर को महंत अवेद्यनाथ की श्रद्धांजलि सभा होगी। 29-30 सितंबर को अखंड मानस पाठ और भंडारा होगा.
समारोह में वृंदावन के स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य, रोहतक हरियाणा के महंत बालकनाथ, जूनागढ़ गुजरात के महंत शेरनाथ, नैमिषारण्य के स्वामी विद्या चैतन्य, गाजियाबाद के महंत नारायण गिरी, वाराणसी के डॉ. रामकमलदास वेदांती, हरिद्वार के महंत चेताईनाथ, कच्छ गुजरात के महंत देवनाथ, वाराणसी के महंत संतोषदास, गुजरात के महंत कमलनाथ, प्रयागराज के जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य, अयोध्या के महंत रामदिनेशाचार्य, स्वामी धराचार्य, महंत राघवाचार्य, महंत रामलखनदास, महंत धर्मदास, ब्रह्मचारी दासलाल, महंत राघवेशदास, महंत राजूदास, देवीपाटन के महंत मिथलेशनाथ, पीर शेरनाथ, योगी लालनाथ, महंत नरसिंहदास, महंत शिवनाथ, योगी जिताईनाथ, जगद्गुरु स्वामी घनश्यामाचार्यज और महंत गंगादास सहित देशभर के संत-धर्माचार्य शामिल होंगे.
विभिन्न सम्मेलनों में डॉ. वी. रामानाथन (आईआईटी, बीएचयू, वाराणसी), प्रो. विनोद सोलंकी (प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख, स्वामी विवेकानंद केंद्र उप्र), प्रो. संजीव कुमार शर्मा (पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतीहारी), प्रो. मुरली मनोहर पाठक (कुलपति, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली), श्याम बिहारी गुप्ता (अध्यक्ष, गोसेवा आयोग उप्र), जसवंत सिंह उर्फ अतुल सिंह (उपाध्यक्ष, गोसेवा आयोग उप्र), प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा (पूर्व अध्यक्ष, उच्च शिक्षा आयोग, प्रयागराज), प्रो. शिवशरण दास (भगवती निवास, आर्यनगर, गोरखपुर), डॉ. पृथ्वीनाथ सिंह (सीनियर रेजीडेंट, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, अम्बेडकरनगर), प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह (निदेशक, गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागराज), प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त (पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष, उप्र हिंदी संस्थान, लखनऊ) और लालमणि त्रिपाठी (गीताप्रेस, गोरखपुर) विशद चर्चा करेंगे.
महुआतर ओवरब्रिज-महेसरा-मोहरीपुर-बरगदवा-राजेंद्रनगर होते हुए मंदिर.ष्ठित हुए। वे हिंदू जीवन पद्धति से प्रेरित समरस, सुगठित और सुदृढ़ समाज के पक्षधर थे।