गोरखपुर : महिला ठग पर 10वीं एफआईआर एम्स थाने में एक शिक्षक की तहरीर पर दर्ज की गई। शिक्षक का आरोप है कि बैंककर्मी बनकर गरिमा सिंह ने उनके नाम पर चार बैंकों से 72.80 लाख रुपये लोन कराया है। लोन के बदले लाभ का लालच दिया था। जिससे गरिमा की बातों में शिक्षक फंस गए। गरिमा अपने पिता के साथ मिलकर अब तक 12 करोड़ रुपये ठगी कर हड़प चुकी है। कुशीनगर के अहिरौली बाजार विशुनपुरा गांव निवासी प्रवीण कुमार सिंह गोंडा के सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। प्रवीण की तहरीर पर मंगलवार को एम्स थाने में झारखंडी कालोनी की गरिमा सिंह, ध्रुव नारायण सिंह, विशाल यादव,संदीप, जितेंद्र निषाद, अरशद अली, रवि कुमार और रीना साहनी के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। प्रवीण सिंह ने बताया कि ध्रुव नारायण सिंह और उनकी बेटी गरिमा सिंह दूर की रिश्तेदार हैं। गरिमा ने बताया था कि वह बैंक में काम करती है। बैंक से जुड़ा कोई काम होगा तो तुरंत करा देगी। गरिमा ने प्रवीण सिंह को गोरखपुर में जमीन दिलाने का लालच दिया। तब प्रवीण सिंह ने आर्थिक परेशान बताकर इन्कार कर दिया था। तब गरिमा ने बताया कि वह एचडीएफसी बैंक में काम करती है। बैंक का आरबीआई स्कीम से आईअप है। इसके तहत एक लोन कराने की बात कही। उसने कहा कि इसकी ईएमआई मैं भरूंगी। लोन कराने पर आपको अधिक लाभ मिलेगा, जिससे आप जमीन खरीद लेंगे। बाकी रकम बिजनेस में लगाउंगी। एक साल के अंदर ईएमआई भर दूंगी। प्रवीण सिंह का आरोप है कि झांसा देकर गरिमा ने गोरखपुर अपने घर बुलाया। यहां गरिमा के पिता ध्रुव नारायण सिंह से बात की। उन्होंने कहा कि गरिमा का अच्छा जुगाड़ है। मेरा भी लोन कराई थी, अब माफ हो गया। उनकी बातें सुनकर प्रवीण लोन के लिए तैयार हो गए।
आरोप लगाया कि अक्टूबर 2024 में गरिमा एक फाइनेंस कंपनी लेकर गई। वहां उसके अन्य सदस्य भी आए। अपने अन्य सदस्यों के साथ मिलकर मुझसे कई कागजों पर साइन कराया। वहीं पर केवाईसी हुई। कुछ ही देर में चार बैंकों से 72.80 लाख रुपये का लोन हो गया। रकम मेरे बैंक खाते में आ गई। इसके बाद मेरे नंबर पर ओटीपी आई। गरिमा के सहयोगी विशाल ने मुझसे ओटीपी ली। इसके बाद सारा पैसा संदीप, जितेंद्र निषाद, अरशद अली, रवि कुमार, रीना साहनी के खाते में चला गया। इसका मोबाइल पर मैसेज भी आया। इसके बाद गरिमा ने मेरे बैंक खाते में 9.50 लाख रुपये अलग-अलग अकाउंट से भेजे। मुझे जमीन खरीदनी थी, इसलिए ज्यादा पूछताछ नही की।
प्रवीण ने बताया कि हर माह लोन की 1.55 लाख ईएमआई आने लगी। जब ईएमआई जमा नहीं हुई तब मेरे पास चारो बैंकों से कॉल आने लगी। इस बारे में गरिमा से पूछने पर वह टाल मटोल करने लगी। बैंक का लगातार दबाव बनने से मेरी मानसिक स्थित खराब होने लगी। इधर पता चला कि वह कई लोगों के साथ ठगी कर चुकी है। एम्स थाना प्रभारी महेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि गरिमा सिंह और अन्य आरोपियों पर एक और एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले की जांच उप निरीक्षक रविंद्र कुमार सिंह को सौंपी गई है। गरिमा और उसके पिता दोनों ही जेल में बंद हैं। अन्य आरोपियों की तलाश चल रही है।
महिला ठग गरिमा सिंह शॉर्टकट से अरबपति बनना चाहती थी। इस चाहत में अफसरों, डॉक्टर और टीचर से करीब 12 करोड़ की ठगी की। इसमे से 10 करोड़ रुपए फ्यूचर एंड ऑप्शन ट्रेडिंग में लगाए। 1 करोड़ की डिफेंडर खरीदने वाली थी, लेकिन अपनी करतूत की वजह से इससे पहले रेलवे अफसर पिता के साथ जेल पहुंच गई। जेल जाने के बाद लगातार नए-नए कारनामे उसके सामने आ रहे हैं। अब तक 10 पीड़ितों की शिकायत पर गोरखपुर और महराजगंज के थाने में 10 एफआईआर लिखी जा चुकी है। गरिमा सिंह पर 12 करोड़ की ठगी का अब तक आरोप लग चुका है। कई और शिकायतें भी आई हैं, जिनकी जांच चल रही है। आने वाले समय में शिकायतें बढ़ने के साथ ही ठगी की रकम भी बढ़ सकती है।
गरिमा सिंह के जैसे-जैसे कारनामे सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे अलग-अलग थानों में एफआईआर भी दर्ज की जा रही है। 10 एफआईआर होने के बाद 10 अलग-अलग विवेचक उसकी जांच में भी जुट गए हैं। विवेचक साइबर एक्सपर्ट की भी मदद ले रहे हैं। पुलिस की जांच में पता चला है कि गरिमा सिंह 10 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। वह अरबपति बनने के लिए फ्यूचर एंड ऑप्शन ट्रेडिंग में ठगी के पैसे लगाती थी। करीब 4 करोड़ रुपए उसने ट्रेडिंग में लगाए थे, जो बर्बाद हो गए।
इसी तरह बैंक में जल्दी लोन कराने के लिए 4 करोड़ रुपए कमीशन पर खर्च कर दिया। जिन लोगों का लोन कराया था, वहां विश्वास जमाने के लिए 2 करोड़ रुपए की किस्त भी भरी थी। इस तरह कुल 10 करोड़ रुपए उसने पानी की तरह बहा दिए। यह सब जानकर अब शिकायतकर्ता भी परेशान हैं कि आखिर अब गरिमा सिंह पैसे कहां से लाकर देगी। दूसरी तरफ लगातार बैंक वाले रिकवरी करने उनके घर पहुंच रहे हैं। पेशे से डॉक्टर और सरकारी नौकरी वाले शिकायतकर्ताओं की रात की नींद उड़ गई है। एम्स और महाराजगंज के घुघली थाने में भी गरिमा सिंह और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपियों के साथ ही लोन देने वाले 6 बैंक के अधिकारियों के खिलाफ भी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। बारीगांव हरखी गांव निवासी डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने 17 अगस्त को तहरीर दी थी। दिलीप महाराजगंज के बरगदवां में पशु चिकिसाधिकारी पद पर तैनात हैं। घुघली थाने में तहरीर के आधार पर गरिमा सिंह, ध्रुव नारायण सिंह, विशाल यादव, साधना मल्ल, मोहन सिंह, दिनकर मणि त्रिपाठी, भानू प्रताप सिंह, बंधन बैंक, चोला मंडलम, यश बैंक, आईसीआईसीआई, एक्सिस और एचडीएफसी बैंक के अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर लिखी गई है।
डॉक्टर ने बताया कि गरिमा सिंह दूर की रिश्तेदारी में आती थी। इसलिए अक्सर घर पर आना जाना होता था। मेरा कार लोन चल रहा था। गरिमा ने बताया कि वह कार लोन माफ करा देगी। जो वह कहती गई, वह करता गया। इस तरह उसने मेरे नाम पर 1.37 करोड़ रुपए लोन निकाल लिया। एम्स थाने में स्टेशन अधीक्षक ब्रह्मानंद सिंह ने 18 अगस्त को तहरीर देकर एफआईआर कराई है। ये गरिमा सिंह पर 9वीं एफआईआर है। ब्रह्मानंद सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके नाम पर 45 लाख रुपए की ठगी गरिमा और उसके गिरोह के लोगों ने की है। तहरीर के आधार पर एम्स थाने में गरिमा सिंह, ध्रुव नारायण सिंह, भानू प्रताप सिंह, विशाल यादव, चंद्र प्रकाश और अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।