बिस्मिल बलिदान शताब्दी वर्ष को राष्ट्रव्यापी अभियान बनाने की तैयारी
गोरखपुर : महान क्रांतिकारी रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ के बलिदान के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर वर्ष 2026-27 को राष्ट्रव्यापी अभियान के रूप में मनाने की तैयारी शुरू हो गई है। 17 दिसंबर 2026 से 19 दिसंबर 2027 तक प्रस्तावित शताब्दी वर्ष का पहला आधिकारिक चरण गोरखपुर में तीन दिवसीय आयोजन के साथ शुरू होगा। महुआ डाबर संग्रहालय की पहल पर नगर निगम सभागार में सोमवार को शताब्दी वर्ष का पोस्टर जारी हुआ। पोस्टर रिलीज कार्यक्रम में संयोजक अविनाश कुमार गुप्ता, महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. शाह आलम राना, पार्षद विजेन्द्र कुमार अग्रहरी (मंगल), हरगोविन्द प्रवाह, सुरेन्द्र कुमार, मोहम्मद सलमान, मारुतिनंदन चतुर्वेदी शामिल हुए। क्रांतिवीर रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ बलिदान शताब्दी समारोह समिति के संयोजक अविनाश कुमार गुप्ता ने बताया कि 17 से 19 दिसंबर तक गोरखपुर में विभिन्न कार्यक्रम होंगे। 19 दिसंबर को ऐतिहासिक फांसी घर के सामने स्थापित रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दो मिनट का मौन और शस्त्र सलामी के साथ राजकीय सम्मान का कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया है। रक्तदान शिविर, संकल्प सभा, प्रतियोगिताओं के विजेताओं का सम्मान और सहभोज भी होगा।
महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. शाह आलम राना ने बताया कि शताब्दी वर्ष के लिए तैयार प्रस्ताव में रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ शोध पीठ की स्थापना, गोरखपुर विश्वविद्यालय के सर्वाधिक अंक पाने वाले विद्यार्थी को ‘अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल स्वर्ण पदक’ देने और शताब्दी वर्ष को ‘राष्ट्रीय एकता वर्ष’ घोषित करने की मांग शामिल है। गोरखपुर मुख्य बस स्टेशन का नाम बिस्मिल के नाम पर रखने और 19 दिसंबर को बलिदान दिवस पर राजकीय सम्मान देने का प्रस्ताव भी है। प्रस्ताव में बिस्मिल के बलिदान के 100 वर्ष पूरे होने पर 100 रुपये का स्मारक सिक्का, विशेष डाक टिकट और प्रथम दिवस आवरण जारी करने, गोरखपुर जेल की मिट्टी से देशभर में 100 ‘शताब्दी स्मारक उपवन’ विकसित करने तथा प्रत्येक में 100 फलदार पौधे लगाने की तैयारी है।
समिति ने संसद के शीतकालीन सत्र में चारों काकोरी शहीदों को सर्वदलीय श्रद्धांजलि देने तथा सूचना एवं प्रसारण और संस्कृति मंत्रालय के माध्यम से ‘बलिदान एक्सप्रेस’ नाम से विशेष प्रदर्शनी ट्रेन चलाने का सुझाव दिया है। बिस्मिल की आत्मकथा, लेख, कविताओं, पत्रों और मुकदमे की कार्यवाहियों को विभिन्न भारतीय भाषाओं में प्रकाशित कराने तथा दुर्लभ दस्तावेजों का डिजिटल और 3डी-वीआर आर्काइव बनाने का भी प्रस्ताव है।