‘खान सर’ के नाम से आईडी बनाकर फंसाता था मकसूद
गोरखपुर : चिलुआताल क्षेत्र से करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड के मामले में जेल भेजे गए मकसूद के नेटवर्क की जांच तेज हो गई है। जांच एजेंसियों को उसके हवाला कारोबार और रुपये के लेन-देन से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस अब उसके संपर्क में रहने वाले 17 करीबियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। इनके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पहचान कर रही है। जरूरत पड़ने पर इन सभी को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया जाएगा। जांच में नेपाल रुपये भेजे जाने के भी संकेत मिले हैं। पुलिस इस बिंदु पर लेन-देन की कड़ियां जोड़ रही है। इसके अलावा तीन अन्य संदिग्ध भी जांच के रडार पर हैं। महमूद सोशल मीडिया पर ‘खान सर’ के नाम से आईडी बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। पुलिस इस पहचान के जरिए बनाए गए संपर्कों, संबंधित मोबाइल नंबरों और संभावित वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटा रही है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस तरीके का इस्तेमाल लोगों से संपर्क बनाने और नेटवर्क का विस्तार करने में किया गया होगा। साइबर कमांडो उपेंद्र सिंह ने बताया कि प्रकरण की जांच में यह सामने आया है कि खान सर के नाम से मकसूद खुद को चर्चित किया था। गोरखपुर में साइबर क्राइम सेल और चिलुआताल पुलिस ने हाल में साइबर ठगी की रकम को म्यूल बैंक खातों से निकालकर क्रिप्टोकरेंसी में बदलने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। पुलिस के मुताबिक, 34 खातों के जरिए करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। रकम को निकालने के बाद डिजिटल करेंसी में बदलकर विदेशी वॉलेट तक पहुंचाने की आशंका है। अब पुलिस बैंक खातों, मोबाइल फोन और डिजिटल लेन-देन की कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। पुलिस ने 9 अक्तूबर को म्यूल खाता खोलकर करोड़ों की जालसाजी के मामले में चिलुआताल के करीमनगर निवासी मकसूद आलम खान, कूड़ाघाट निवासी प्रज्ञा रतन, बसंतपुर निवासी रवि वर्मा, चंदौली निवासी आदर्श सिंह व नौतनवा निवासी नवनीत पांडेय को गिरफ्तार किया था। आरोपितों के पास से पुलिस ने 13.76 लाख रुपये नकद, 4710 रुपये नेपाली व लैपटॉप आदि बरामद किया था।