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Wednesday, 1st April, 2026
भटहट
रूरल न्यूज नेटवर्क। गुलरिहा थाना क्षेत्र के
जंगल हरपुर में प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली पालन के मामले में जांच के छह माह बाद
भी कार्रवाई अधर में लटकी है। मत्स्य विभाग ने सितंबर में शिकायत मिलने के बाद
छापेमारी की थी, जिसमें करीब 20 छोटे-बड़े तालाबों का निरीक्षण किया गया था।
ग्रामीण
रामचंद्र चौहान ने मत्स्य पालन विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को शिकायत दी थी।
उन्होंने बताया था कि जंगल हरपुर में बड़े पैमाने पर थाई मांगुर मछली का पालन किया
जा रहा है। इन मछलियों को खिलाने के लिए गोरखपुर से मुर्गी की चर्बी और पखना लाया
जाता है, जिसे उबालकर तालाबों में
डाला जाता है।
चौहान ने अपनी
शिकायत में यह भी बताया था कि इस प्रक्रिया से पूरे गांव में आवारा कुत्ते जमा हो
जाते हैं, जो बकरियों और अन्य जानवरों
को दौड़ाकर काटते हैं। इसके अलावा, बचे हुए मांस
के अवशेष सड़ने से बदबू और प्रदूषण फैलता है, जिससे
ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
शिकायत की
गंभीरता को देखते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी लोनिया टोला पहुंचकर 20 तालाबों का स्थलीय निरीक्षण किया था। इस दौरान जाल डालकर
मछलियों की प्रजाति की पहचान की गई।
जांच में चार
व्यक्तिगत तालाबों में बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली पाई गईं। साथ
ही, मध्यकार आरएएस परियोजना के
एक लाभार्थी के पक्के टैंक में भी मांगुर मछली के बच्चे मिले थे। मत्स्य विभाग ने
इन तालाबों में दवा डालकर मछलियों को नष्ट कर दिया था।
जांच रिपोर्ट के बाद, मत्स्य विभाग ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश के बाद यह मामला अब गुलरिहा थाने पहुंच गया है। थानाध्यक्ष इत्यानंद पांडेय ने बताया कि जल्द ही इस मामले में केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।