शिक्षक सुसाइड केस, 4 महीने बाद भी आरोपी फरार, BSA-लिपिक की तलाश जारी, परिजनों ने पुलिस पर संरक्षण का लगाया आरोप
रूरल न्यूज नेटवर्क।शिक्षक कृष्ण
मोहन सिंह सुसाइड केस में लगभग चार महीने बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी बीएसए
शालिनी श्रीवास्तव और निलंबित लिपिक संजीव सिंह की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।पुलिस की ओर से इनाम राशि बढ़ाकर 25 हजार करने और गैर जमानती वारंट जारी करने का भी कोई असर
नहीं दिखा। इतना ही नहीं उनकी संपत्ति कुर्क करने की बात भी कही गई तब भी वे बाहर
नहीं आएं।दोनों के खिलाफ फरवरी में
गुलरिहा थाने में FIR दर्ज हुआ तब से
ही गायब हैं। दावा है कि पुलिस की तीन टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, लेकिन आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
BSA को पुलिस का
संरक्षण मिलने का आरोप
पुलिस का दावा है कि तकनीकी
साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। स्थानीय स्तर पर
आरोप लगाए जा रहे हैं कि निलंबित बीएसए को पुलिस विभाग की एक महिला अधिकारी का
संरक्षण प्राप्त है।दोनों
रिश्तेदार होने की भी चर्चा है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
हैरानी की बात यह है कि दोनों आरोपी न्यायालय में अपने मुकदमे की पैरवी भी कर रहे
हैं, फिर भी पुलिस को उनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा
है।
तलाश में छापेमारी चल रही
हाईकोर्ट ने शालिनी
श्रीवास्तव की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करते हुए तल्ख टिप्पणी की थी। कोर्ट ने
माना कि मामले में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया
कि बीएसए की तलाश में छापेमारी चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही गिरफ्तार कर लिया
जाएगा।पुलिस को दी गई तहरीर में मृतक की पत्नी गुड़िया
सिंह ने बताया था कि कृष्ण मोहन सिंह की नियुक्ति एक जुलाई 2016 को कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, देवरिया में सहायक अध्यापक के पद पर हुई थी।
साल 2023 में गलत तरीके से उनकी और दो अन्य लोगों की नियुक्ति निरस्त
कर दी गई। इसके खिलाफ कृष्ण मोहन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 13 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट ने
निरस्तीकरण के आदेश को निरस्त करते हुए नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया।
Image Source Here...
जिसकी प्रति
बीएसए देवरिया को भेज दी गई, लेकिन इसके
बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोपी लिपिक संजीव कुमार सिंह ने कृष्ण मोहन सिंह
और दो अन्य शिक्षकों से नियुक्ति बहाली के नाम पर 16-16 लाख रुपये की
रिश्वत मांगी।
किश्तों में की थी भुगतान
पीड़ितों ने उन्हें
अलग-अलग किश्तों में सात लाख, नौ लाख और 16 लाख रुपए का भुगतान किया। इसके बाद भी आरोपित ने और
रुपये की डिमांड करना शुरू कर दिया। जब शिक्षकों ने असमर्थता जताई तो आरोपित ने उन
पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।