Default left Ad
Default right Ad
gorakhpur, cm yogi, cold day, World, Yadu Dham, Peeth 16-Jan-2026 09:15 AM

गोरखपुर में बनेगा विश्व का पहला ‘श्री यदुधाम पीठ’: महाराज यदु सहित तीन प्रतिमाओं के निर्माण का ऐलान, चुनावी असर पर चर्चा

गोरखपुर में चौरी-चौरा विधानसभा क्षेत्र के ब्रह्मपुर में विश्व की पहलीश्री यदुधाम पीठस्थापित करने की घोषणा की गई है। पीठ परिसर में महाराज यदु की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। घोषणा ओबीसी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और श्रीकृष्ण धर्म ट्रस्ट के प्रमुख काली शंकर यदुवंशी ने प्रेस वार्ता में की। उन्होंने कहा कि पीठ को यदुवंशी समाज की पहचान, सम्मान और संगठन का केंद्र बनाने की योजना है।

पीठ परिसर में श्री राधा-कृष्ण और सहस्त्रबाहु अर्जुन (कार्तवीर्य अर्जुन) की प्रतिमाएं भी लगाने का प्रस्ताव है। इसे धार्मिक, सांस्कृतिक और वैचारिक गतिविधियों का केंद्र बनाया जाएगा। प्रेस वार्ता में यदुवंशी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके परिवार पर टिप्पणी करते हुए कहा किमहाराज यदु को केवल परिवार तक सीमित रखा गया, जबकि प्रतिमा स्थापना की पहल विश्व स्तर पर होनी चाहिए थी।

गोरखनाथ पीठ को लेकर जवाब

गोरखनाथ पीठ पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, “बाबा गोरखनाथ हमारे आराध्य हैं। गोरखनाथ पीठ भी हमारी ही है।उन्होंने कहा कि यह विषय धार्मिक भी है और सामाजिक-राजनीतिक भी। यदुवंशी ने कहा किराजनीतिक विचारधाराएं अस्थायी होती हैं, समाज की चेतना स्थायी है।उनके अनुसार समाज को किसी एक दल या परिवार से जोड़कर देखना उचित नहीं है।

यदुवंशी समाज में पिछले वर्षों से ऐतिहासिक- सांस्कृतिक पहचान को पुनर्स्थापित करने की मांग बढ़ी है। महाराज यदु को यादव वंश की जड़ों के प्रतीक के रूप में स्थापित करने का प्रयास इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। पीठ को सांस्कृतिक शिक्षा, संवाद और आयोजन के मंच के रूप में विकसित करने की योजना है ताकि आने वाली पीढ़ियों तक सामाजिक विरासत और पहचान पहुंचाई जा सके।

राजनीति में OBC समूहों पर ध्यान बढ़ा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूपी की राजनीति में ओबीसी वर्ग की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। यदुवंशी समाज की जनसंख्या पूर्वांचल सहित कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय मानी जाती है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार प्रतिमा स्थापना और पीठ निर्माण की घोषणा आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में प्रभाव डाल सकती है। समाज का दलगत खेमों में विभाजन और पुनर्संगठन चुनावी रणनीतियों का हिस्सा बन सकता है।

धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से असर का विस्तारविशेषज्ञ मानते हैं कि पहचान आधारित आयोजन, धार्मिक कार्यक्रम और सामाजिक सम्मेलन भविष्य में असर क्षेत्र बढ़ाने का साधन बन सकते हैं। ट्रस्ट द्वारा पीठ के लिए भूमि, स्थापत्य ढांचे, प्रतिमा निर्माण और कार्यक्रम संबंधी विवरण पर कार्य किया जा रहा है।

जल्द ही निर्माण की समय-सीमा और मॉडल को लेकर भी घोषणा हो सकती है। यदुवंशी ने कहा कि पीठ की स्थापना समाज के भीतर संवाद, एकता और संगठन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Static Fallback middleAd2 Ad

अपने ज़िले और उसके गांवों की खबरें जानने के, लिए जुड़े हमसे अभी

×