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Saturday, 16th May, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। गोरखपुर शहर का
उत्तरी क्षेत्र जलभराव से मुक्त हो सकेगा। सीधे तौर पर लगभग 5 लाख की आबादी को इसका फायदा होने जा रहा है। 15 जून तक इस नाले का निर्माण पूरा हो जाएगा। 9.25 किलोमीटर नाले को बनाने में 495 करोड़ रुपये
खर्च हो रहे हैं। गोड़धोइया नाला परियोजना के तहत पक्का नाला निर्माण, डायवर्जन, इंटरसेप्शन और
ट्रीटमेंट का काम हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो स्थानों पर
शुक्रवार को इसका निरीक्षण किया। उन्होंने बचे हुए कार्यों को जल्द पूरा करने को
कहा। मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि 15 जून तक यह काम
पूरा हो जाएगा।
मुख्यमंत्री सबसे पहले
गोड़धोइया नाला के जीरो प्वाइंट जंगल छत्रधारी पहुंचे। उन्होंने निर्माण कार्य, पक्के नाले में जल प्रवाह को देखने के साथ ही परियोजना के
ड्राइंग मैप व मॉडल का अवलोकन किया। कार्यदायी संस्था जल निगम (शहरी) के
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि परियोजना की अब तक की कुल भौतिक प्रगति 95 प्रतिशत है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 9.25 किमी की लंबाई में नाला निर्माण हो चुका है। 38 एमएलडी की एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) बन गई और
वर्तमान में इसका ट्रायल रन चल रहा है। 61 एमएलडी क्षमता
के पंपिंग स्टेशन का भी कार्य पूर्ण हो गया है और इसका भी ट्रायल रन किया जा रहा
है। 17.94 किमी इंटरसेप्टिंग सीवर
लाइन में से 17.50 किमी तक काम हो गया है, शेष कार्य भी जारी है। 14 ब्रिज/कल्वर्ट
भी बन गए हैं। शेष कार्य को भी तेजी से कराया जा रहा है। यह परियोजना एक मृत नाले
को पुनर्जीवित करने का माध्यम बनी है।
जलभराव से नहीं
जूझेगा शहर का उत्तरी छोर
गोड़धोइया नाला परियोजना
पूरी हो जाने से उत्तर क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इस वर्ष मानसून से
पहले आधे शहर की जलभराव की समस्या दूर हो जाएगी। यहां के लोगों को जलभराव से नहीं
जूझना होगा। सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि गोरखपुर में जल भराव एक बड़ी चुनौती
थी। इससे जल जनित और मच्छर जनित बीमारियों को बढ़ावा मिल रहा था। अब इस समस्या का
समाधान हो गया है। उन्होंने कहा कि गोड़धोइया नाला अब न केवल अतिक्रमण मुक्त हो गया
है बल्कि जल भराव की समस्या को दूर करने का भी बड़ा माध्यम बन रहा है। उन्होंने
बताया कि वन महोत्सव के दौरान इस नाले के दोनों तरफ पौधरोपण अभियान को भी बढ़ावा
दिया जाएगा।
नाले के दोनों
तरफ मिलेगा वैकल्पिक मार्ग
अब गोड़धोइया
नाले में कोई सीवर और कोई गंदा नाला नहीं गिर रहा है, इसमें केवल शुद्ध पानी प्रवाहित होगा। सीवर और ड्रेनेज के
लिए इसमें दोनो तरफ अलग से लाइन बिछायी गयी है, जो भूमिगत है।
उन्होंने कहा कि करीब 9.5 किमी का आरसीसी
से निर्मित किया नाला 9 मीटर चौड़ा है।
वर्षा काल में यह नाला गोरखपुर महानगर के जल को रामगढ़ताल, तरकुलानी होते हुए राप्ती नदी में छोड़ देगा। उन्होंने कहा
कि इस नाले में 14 कलवर्ट/ब्रिज
बनाए गए हैं जो इस पार से उस पार तक आवागमन को आसान बनाएंगे। इस नाले के दोनों तरफ
सड़क के निर्माण कार्य को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे इस क्षेत्र के लोगों को एक
वैकल्पिक मार्ग प्राप्त होगा।
जल जमाव, मच्छर व बीमारी की समस्या का स्थायी समाधान
सीएम योगी ने
कहा कि इस परियोजना में 38 एमएलडी की
एसटीपी और 61 एमएलडी क्षमता के पंपिंग
स्टेशन का भी निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि गोड़धोइया नाले के पुनरूद्धार
का निर्माण कार्य को लगभग 15 जून तक पूर्ण
करने का प्रयास है। इससे गोरखपुर को जल जमाव, मच्छर व बीमारी
की समस्या का स्थायी समाधान प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि मोहल्लों की गंदगी अब
सीवर लाइन से सीधे एसटीपी तक पहुंचाकर उसका शोधन होगा। इससे इस क्षेत्र की लगभग 5 लाख आबादी लाभान्वित होगी।
शोधित पानी जाएगा रामगढ़ताल
में
बिछिया जंगल तुलसीराम पश्चिमी, शिवपुर शहबाजगंज, जंगल शालिग्राम, बिछिया जंगल तुलसीराम पूर्वी, रेलवे बिछिया कॉलोनी, शाहपुर, भेड़ियागढ़, घोसीपुरवा, सेमरा, बशारतपुर, मानबेला, राप्तीनगर, लोहिया नगर, जंगल नकहा, राम जानकी नगर, शक्तिनगर एवं चक्सा हुसैन से जनित सीवेज जो नाले में बहते हैं, उन्हें 38 एमएलडी एसटीपी पर शोधित कर रामगढ़ताल में प्रवाहित किया जाएगा। नाला अतिक्रमण मुक्त होने से इसके कैचमेंट एरिया (अधिग्रहण क्षेत्र) में आने वाली विभिन्न कालोनियों में जलभराव की समस्या का भी निदान हो जाएगा।