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Sunday, 17th May, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। गोरखपुर में
व्यापारी से लूट के मामले में फरार चल रहे निलंबित दरोगा ने आखिरकार कोर्ट में
सरेंडर कर दिया। राजघाट पुल पर हुई इस वारदात के बाद वह लंबे समय से वांछित था।
कोर्ट में आत्मसमर्पण के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। वहीं, एक महिला दरोगा
समेत तीन आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस दबिश
दे रही है।
यह घटना 5 अगस्त 2025 की है।
राजस्थान में व्यापार करने वाले बेलीपार पिछौरा निवासी रविशंकर को राजघाट पुल के
पास कार सवार लोगों ने रोक लिया। आरोपियों ने खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए
व्यापारी को डराया-धमकाया और उससे 90 हजार रुपये लूट लिए।
जांच में सामने आया कि लूट
करने वाले कोई और नहीं बल्कि नौसड़ पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी ही थे। इसमें
लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विरामखंड निवासी नौसड़ चौकी प्रभारी भी शामिल था।
चौकी प्रभारी समेत पांच
निलंबित
मामले का खुलासा होते ही
पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। जांच के बाद तत्कालीन चौकी प्रभारी शुभम
श्रीवास्तव, महिला दरोगा आंचल और सिपाही प्रवीण यादव, राजेश चौधरी व
सुभाष यादव को निलंबित कर दिया गया था।
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली
वारदात के बाद
सभी आरोपी फरार हो गए थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपियों ने हाईकोर्ट से स्टे
भी लिया था, लेकिन उन्हें जांच में सहयोग करने की शर्त दी गई
थी। बाद में सामने आया कि आरोपी जांच में शामिल नहीं हो रहे थे और पीड़ित व्यापारी
को धमकी देकर समझौते का दबाव बना रहे थे। इस पर हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगी रोक
हटा दी।
शुक्रवार को निलंबित दरोगा
शुभम श्रीवास्तव ने विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ओमकार शुक्ल की
अदालत में सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में लेते हुए जेल भेज
दिया।
धमकी देने पर नई FIR
पीड़ित व्यापारी ने गीडा
थाने में आरोपियों के खिलाफ धमकी देने की एक और एफआईआर दर्ज कराई है। मामले की
गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इसमें भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराएं भी जोड़ दी हैं।
सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी ने बताया- मुख्य आरोपी शुभम श्रीवास्तव के जेल जाने के बाद फरार महिला दरोगा और अन्य सिपाहियों की तलाश तेज कर दी गई है।