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gorakhpur, cm yogi, gas agency 23-May-2026 01:16 PM

गोरखपुर की एक गैस एजेंसी पर 33 लाख का जुर्माना, होम डिलीवरी में लापरवाही, उपभोक्ताओं को रात भर गोदाम पर रुकने को किया मजबूर

रूरल न्यूज नेटवर्क। गोरखपुर में एक गैस एजेंसी पर 33 लाख का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाही भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से की गई है। दरसअल लंबे समय से इस एजेंसी के खिलाफ होम डिलीवरी न करने और उपभोक्ताओं को गोदाम पर रात भर रुकने को मजबूर करने की शिकायतें मिली थी।

जांच में सही पाए जाने पर यह सख्त कार्रवाई की गई है। जानकारी के मुताबिक एजेंसी को इसके पहले भी समय पर होम डिलीवरी के निर्देश दिए गए थे। जिसकी अनदेखी की गई थी। BPCL का साफ़ कहना है कि भविष्य में ऐसी गलती दोहराई जाने पर लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, इस गैस एजेंसी के खिलाफ लंबे समय से उपभोक्ता शिकायतें कर रहे थे। जिसमें सामने आया कि एजेंसी जान बूझकर को होम डिलीवरी की सुविधा नहीं दे रही थी।

इसके बजाय लोगों को एजेंसी और गैस गोदाम के बाहर लंबी लाइनों में खड़ा होने के लिए मजबूर किया जा रहा था, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। एजेंसी की कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर पाने के लिए रात में ही गोदाम के बाहर पहुंचकर इंतजार करना पड़ता था।

रात को एजेंसी पर सोते थे उपभोक्ता

लोग शाम से ही लाइन में लग जाते थे और पूरी रात खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर होते थे, ताकि सुबह नंबर लग सके। इसके बावजूद, जब वितरण शुरू होता था तो कई उपभोक्ताओं को यह कहकर लौटा दिया जाता था कि गैस खत्म हो गई है या स्टॉक उपलब्ध नहीं है। महिलाएं, बुजुर्ग और दूर-दराज से आने वाले लोग इस अव्यवस्था से सबसे ज्यादा प्रभावित होते थे।

पूरी रात इंतजार करने के बाद भी खाली हाथ लौटना उनके लिए न केवल समय और पैसे की बर्बादी थी, बल्कि मानसिक और शारीरिक परेशानी का कारण भी बन रहा था। उपभोक्ताओं ने इसे अमानवीय स्थिति बताते हुए कई बार शिकायत दर्ज कराई।

सूत्रों के अनुसार, एजेंसी के कर्मचारियों पर उपभोक्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार करने और वितरण में पारदर्शिता न बरतने के भी आरोप लगे हैं। जांच में यह भी सामने आया कि एजेंसी की ओर से कृत्रिम रूप से लाइन लगवाकर वितरण किया जा रहा था, जो कंपनी के दिशा-निर्देशों के विपरीत है।

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होम डिलीवरी में कोताही ‘मिसकंडक्ट’ माना

बीपीसीएल की ओर से की गई जांच में शिकायतों को सही पाया गया। जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि एजेंसी ने कंपनी के नियमों और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है और उपभोक्ता सेवाओं में गंभीर लापरवाही बरती है। विशेष रूप से होम डिलीवरी जैसी बुनियादी सुविधा में कोताही को कंपनी ने गंभीर ‘मिसकंडक्ट’ माना।

निर्देशों की अनदेखी की

कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि सभी गैस एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को समयबद्ध और सुविधाजनक होम डिलीवरी उपलब्ध कराई जाए। इसके बावजूद गंगा गैस एजेंसी ने इन निर्देशों की अनदेखी की, जिसके चलते यह सख्त कार्रवाई करनी पड़ी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि एजेंसी के इस रवैये से वे लंबे समय से परेशान थे। कई बार शिकायत करने के बावजूद जब सुधार नहीं हुआ, तब मामला कंपनी के उच्चाधिकारियों तक पहुंचा। अब इस कार्रवाई के बाद उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि व्यवस्था में सुधार होगा और उन्हें राहत मिलेगी।

गलती दोहराने पर लाइसेंस निरस्त होगा

 बीपीसीएल ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में भी एजेंसी की ओर से इस तरह की लापरवाही दोहराई जाती है, तो और कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें एजेंसी का लाइसेंस निरस्त करने तक का प्रावधान शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई अन्य गैस एजेंसियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि उपभोक्ता हितों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कंपनियां अब सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर अधिक सख्त रुख अपना रही हैं।

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