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गोरखपुर / चरगांवा
• 06-03-2026
DDU में बन रही हाईटेक नर्सरी, 99 लाख 65 हजार का बजट पास
रूरल न्यूज नेटवर्क।डीडीयू के इंस्ट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर एंड नेशनल साइंसेज की ओर
से मैत्री छात्रावास के सामनेहाईटेक नर्सरी तैयार किया जा रहा है। इसके
माध्यम से एग्रीकल्चर के स्टूडेंट्स और पीएचडी स्कॉलर को आधुनिक और तकनीकी खेती की
बारीकियों को जानने का मौका बेहतरीन मौका मिलेगा।
इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. आरआर
सिंह से बताया की यूपी के उद्यान विभाग की ओर से 99 लाख 65 हजार का बजट पास हुआ है। जिसमें एक हाईटेक
नर्सरी (आधुनिक पौधशाला) ग्रो किया जाएगा। इसके लिए 1 एकड़ जमीन में काम शुरू हो गया है, जो अपने अंतिम रूप में है।टेंडर के माध्यम से यह काम किया जा रहा है।
जिसका ढांचा तैयार कर लिया गया है। पूरे एरिया में लोहे का ग्रील लगा दिया गया है।
उसके ऊपर शेड लगाना बाकी है। इसके अंदर 12 बड़े मॉडर्न फैन और
18 पैड भी लगाएं गए हैं। जो तापमान, ह्यूमेडिटी (उमस) और अन्य चीजें मेंटेन रखेगा।
जो नर्सरी विकसित की जाएगी उससे पूर्वांचल के
किसानों को भी फायदा मिलेगा। उन्हें ऑफ टाइम नर्सरी भी उपलब्ध की जाएगी। इसके
अलावा हम तकनीकी सूचना केंद्र भी बनाएंगे। जिससे किसानों को तकनीकी जानकारी मिल
सके।
आधुनिक व्यस्थाओं
से लैस
यह नर्सरी पूरी तरह आधुनिक व्यवस्थाओं से लैस
होगा। इसमें 12 पंखे लगाएं गए हैं। जिन्हें बिजली के माध्यम से
चलाया जाएगा। पंखों से निकलने वाली हवाओं से पौधों के लिए तामपान, नमी और ह्यूमिडिटी मेंटेन होगा। इससे पौधों को
पर्याप्त मात्रा में पोषण मिलने में मदद मिलेगी और वे अच्छे से ग्रो करेंगे।
प्रॉफिट से होगा
ऑपरेट
इस नर्सरी में जो भी पौधे उगेंगे उसे मार्केट
में सेल किया जाएगा। जो प्रॉफिट होगी उससे इस हाईटेक नर्सरी को संचालित किया
जाएगा। इस नर्सरी में पौधों को नई तकनीकी से विकसित करेंगे। जिससे स्टूडेंट्स कृषि
क्षेत्र की आधुनिकता को समझ पाएंगे।
प्रोफेसर आरआर सिंह ने बताया- इस प्रोजेक्ट के
अंतर्गत हम यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चर में पीएचडी कर रहे रिसर्चर को प्रोटेक्टेड
कल्टीवेशन (संरक्षित खेती) में रिसर्च देंगे। जिससे इस तरह की खेती करने के लिए
क्या-क्या कर सकते हैं।
प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन कैसे की जाती है। इसमें
समस्याएं क्या आती हैं और आने वाले समय में किस नई तकनीकी का इस्तेमाल किया जा
सकता है। इन सब विषयों पर शोध किया जाएगा। आधे जगह में नर्सरी तैयार की जाएगी और
आधे में रिसर्च का काम होगा।
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हाइड्रोपोनिक खेती
के लिए भी प्रयासरत
उन्होंने बताया कि इसके अंदर ऐसा स्ट्रक्चर
तैयार किया जाएगा, जिसमें हाइड्रोपोनिक खेती मतलब बिना मिट्टी
वाली खेती पर भी काम हो सके। इस तरह की खेती के लिए पौधे उगाने के लिए मिट्टी का
इस्तेमाल नहीं जाता है।
बल्कि पानी और पोषक तत्वों का उपयोग करके
पीवीसी पाइप या बेड में कोकोपीट/क्ले पेबल्स के सहारे उगाया जाता है। इस प्रक्रिया
में कम जगह और कम पानी का उपयोग होता है।
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