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gorakhpur, cm yogi, solar system 15-Apr-2026 03:59 PM

दुर्लभ धूमकेतु का नजारा, 1.7 लाख साल बाद सौरमंडल के अंदरूनी हिस्से में पहुंचा, 19 अप्रैल को सबसे ज्यादा चमक की संभावना

रूरल न्यूज नेटवर्क गोरखपुर में भोर के समय आकाश में दुर्लभ धूमकेतु Comet C/2025 R3 (Pan-STARRS) का स्पष्ट दृश्य देखने को मिल रहा है। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार यह धूमकेतु इन दिनों पृथ्वी के पास से गुजर रहा है, जिससे यह आम लोगों के लिए भी दिखाई दे रहा है।

खगोलविदों के अनुसार धूमकेतु बर्फ, धूल और गैस से बने पिंड होते हैं। जैसे ही ये सूर्य के करीब पहुंचते हैं, इनसे गैस और धूल निकलती है, जिससे इनके चारों ओर चमकीला आवरण और लंबी पूंछ बनती है। यही वजह है कि यह आकाश में चमकदार लकीर की तरह दिखाई देता है।

1.7 लाख साल बाद लौटा धूमकेतु इस धूमकेतु की खोज सितंबर 2025 में पैन-स्टार्स सर्वे द्वारा की गई थी। वैज्ञानिकों के अनुसार यह करीब 1.7 लाख साल बाद सौरमंडल के अंदरूनी हिस्से में पहुंचा है। इसी कारण इसे बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना माना जा रहा है।

10 से 20 अप्रैल के बीच इसका सबसे अच्छा दृश्य मिल रहा है। भारत में इसे सुबह करीब 4:30 से 5:30 बजे के बीच देखा जा सकता है। पूर्व और पूर्व-उत्तर दिशा में, खुले आसमान और कम रोशनी वाले स्थान पर इसे आसानी से देखा जा सकता है।

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19 अप्रैल को सबसे ज्यादा चमकने की संभावना

 धूमकेतु का उपसौर (Perihelion) 19 अप्रैल को होगा। इस दिन यह सूर्य के सबसे करीब रहेगा और अधिक चमकीला दिखाई दे सकता है, हालांकि सूर्य के पास होने से इसे देखना थोड़ा मुश्किल भी हो सकता है। अभी यह धूमकेतु पेगासस तारामंडल में दिखाई दे रहा है, जबकि 19 और 20 अप्रैल को मीन तारामंडल की ओर शिफ्ट होगा।

इसकी चमक 6 से 8 मैग्नीट्यूड के बीच आंकी गई है। साफ और अंधेरे स्थानों पर इसे नंगी आंखों से भी देखा जा सकता है, जबकि दूरबीन या बाइनोकुलर से दृश्य और स्पष्ट होगा।

फोटोग्राफी के लिए सुनहरा मौका

खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार यह समय धूमकेतु की फोटोग्राफी के लिए भी अनुकूल है। DSLR या मिररलेस कैमरा, ट्राइपॉड और सही सेटिंग (ISO 800–3200, 5–15 सेकंड एक्सपोजर) के साथ इसकी शानदार तस्वीरें ली जा सकती हैं। 17 अप्रैल को अमावस्या होने के कारण चंद्रमा का प्रकाश नहीं रहेगा, जिससे धूमकेतु को देखने की स्थिति और बेहतर हो जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार धूमकेतु सिर्फ आकर्षक दृश्य नहीं होते, बल्कि यह ब्रह्मांड की शुरुआती संरचना और रहस्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी अपने साथ लाते हैं। ऐसे में यह घटना वैज्ञानिकों और आम लोगों दोनों के लिए खास मानी जा रही है।

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