एबीवीपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई की मांग, शिक्षा सुधार को लेकर रखे कई प्रस्ताव
रूरल न्यूज नेटवर्क।अखिल भारतीय
विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान अपनी राष्ट्रीय
कार्यकारी परिषद की बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णयों की जानकारी दी। संगठन ने
शिक्षा सुधार, महिलाओं की सुरक्षा, शहरी माओवाद और राष्ट्रीय
सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पारित प्रस्तावों को साझा किया।एबीवीपी ने पेपर लीक और परीक्षा में धांधली की घटनाओं पर
चिंता जताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। साथ ही भारतीय भाषाओं
में परीक्षाएं कराने, विश्वविद्यालयों में खाली पड़े कुलपति पदों पर जल्द
नियुक्ति और शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की बात कही।
संगठन ने आने वाले वर्ष में कई देशव्यापी अभियान चलाने
की घोषणा भी की। इनमें ‘SEIL@60’, ‘स्क्रीन टाइम टू
एक्टिविटी टाइम’, वंदे मातरम् के 150 वर्ष, आपातकाल के 50 वर्ष और
गुरु तेग बहादुर के 350वें बलिदान वर्ष से जुड़े कार्यक्रम प्रमुख रूप से
शामिल हैं।पश्चिम
बंगाल के लोगों का लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए अभिनंदन किया गया।
शिक्षा में सुधारों को जमीन पर सही तरीके से लागू करने
की मांग की गई।
जंगलों में माओवाद खत्म होने की कगार पर है, लेकिन शहरों में पैर पसार रहा 'शहरी माओवाद' एक बड़ी चुनौती है।
आपराधिक और जिहादी सोच के कारण महिलाओं के शोषण और
जबरन धर्म परिवर्तन (मतांतरण) पर रोक लगाने की मांग की गई। इसके अलावा, दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल के बीच देश के युवाओं
की भूमिका और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
पेपर लीक और धांधली करने
वालों पर हो कड़ी कार्रवाई
एबीवीपी ने साफ कहा कि
नीट-यूजी (NEET-UG), सीयूईटी (CUET) और सीबीएसई (CBSE) जैसी बड़ी
परीक्षाओं में जो गड़बड़ियाँ और पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, वे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं।संगठन ने मांग
की है कि दोषियों पर तुरंत और कड़ी कार्रवाई हो, एनटीए (NTA) की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और आगे से ऐसा न हो, इसके लिए एक पूरी तरह से सुरक्षित और पारदर्शी परीक्षा
सिस्टम बनाया जाए।
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तीन भाषाओं वाली नीति और
भारतीय भाषाओं में परीक्षा की मांग
बैठक में सीबीएसई (CBSE) की त्रि-भाषा नीति की तारीफ की गई। एबीवीपी ने मांग की है
कि देश की सभी बड़ी परीक्षाएं भारतीय भाषाओं में भी जरूरी रूप से कराई जाएं, ताकि छात्रों को अपनी भाषा में आगे बढ़ने का मौका मिले।
रिसर्च-नए आविष्कारों के लिए कंपनियों को लिखेंगे चिट्ठी
एबीवीपी का मानना है कि
यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में रिसर्च, नए आविष्कारों
(नवाचार) और पेटेंट को बढ़ावा देने के लिए बड़ी कंपनियों (उद्योग जगत) को निवेश
बढ़ाना चाहिए। इसके लिए आईआईटी और यूनिवर्सिटीज में मिलकर मॉडर्न लैब बनाई जानी
चाहिए।भारतीय भाषाओं में रिसर्च पेपर लिखने वालों को
इनाम और मदद मिलनी चाहिए। इसके लिए एबीवीपी का एक डेलीगेशन (प्रतिनिधिमंडल) देश की
बड़ी कंपनियों के मालिकों से मुलाकात करेगा और उन्हें लेटर लिखेगा।
खाली पड़े कुलपति के पदों
पर तुरंत हो नियुक्ति
संगठन ने देश की 13 से ज्यादा सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में खाली पड़े वीसी के पदों
को तुरंत भरने की मांग की है। एबीवीपी इस मामले में दखल देने के लिए राष्ट्रपति जी
को एक चिट्ठी लिखेगा, क्योंकि वीसी न
होने से पढ़ाई और प्रशासनिक काम प्रभावित हो रहे हैं।
संगठन में इन पदाधिकारियों
को मिली नई जिम्मेदारी
बैठक के आखिरी हिस्से में
नई सांगठनिक जिम्मेदारियों की घोषणा की गई। इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश के
क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही और गोरक्ष प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री
पुनीत अग्रवाल के पदों को दोबारा तय किया गया। वहीं, बस्ती
विभाग के संगठन मंत्री आकाश गौण को प्रमोट करके काशी प्रांत का प्रांत संगठन
मंत्री बनाया गया है।प्रेस कॉन्फ्रेंस में
गोरक्ष प्रांत मंत्री शशिकांत मंगलम गुप्ता के साथ राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य
सम्पदा द्विवेदी, प्रांत मीडिया संयोजक शिवम पांडेय और महानगर मंत्री
अभिषेक मौर्या भी मौजूद रहे।