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• gorakhpur, cm yogi, cold day, AIIMS, High Court • गोरखपुर / चरगांवा • 20-02-2026

एम्स गोरखपुर नहीं देगा छात्रों को कानूनी मदद, मारपीट मामले में हाईकोर्ट ने 17 छात्रों को भेजा नोटिस

रूरल न्यूज नेटवर्क। गोरखपुर एम्स प्रशासन ने आपसी मारपीट के मामले में नोटिस पाए छात्रों को कानूनी मदद देने से इनकार कर दिया है। एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के दो गुटों के बीच हुई यह लड़ाई उनका व्यक्तिगत मामला है और इसमें एम्स प्रशासन कोई हस्तक्षेप या सहायता नहीं करेगा। इसका अर्थ है कि छात्रों को हाई कोर्ट में अपने वकील के माध्यम से नोटिस का जवाब देना होगा।

यह मामला 30 नवंबर 2024 को एम्स परिसर में एमबीबीएस छात्रों के बीच हुई मारपीट से जुड़ा है। एम्स प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर एमबीबीएस छात्र जितेंद्र भाटी ने 17 छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए एम्स थाने में शिकायत की थी। पुलिस की ओर से भी कार्रवाई न होने पर यह मामला अदालत पहुंचा, जिसके बाद हाई कोर्ट ने नोटिस जारी किया। कार्यकारी निदेशक को संबोधित एक पत्र में, एमबीबीएस छात्रों ने अप्रैल में होने वाली प्री-प्रोफेशनल और मई में होने वाली प्रोफेशनल परीक्षाओं का हवाला दिया है।

उन्होंने कहा कि अंतिम वर्ष के छात्रों के रूप में यह अवधि उनके लिए शैक्षणिक और व्यावसायिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। छात्रों ने बताया कि उनमें से दो ने इंटर्नशिप पूरी कर ली है, फिर भी स्नातकोत्तर परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय वे इस कानूनी प्रक्रिया में उलझे हुए हैं। उन्होंने चल रहे कानूनी मामले के कारण गंभीर मानसिक तनाव और इसके तैयारी व स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव की बात कही। छात्रों ने यह भी उल्लेख किया कि इस मामले से कॉलेज की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंच रहा है।

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पत्र में यह भी लिखा गया है कि एमबीबीएस 2021 बैच का एक छात्र उनके खिलाफ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत मुकदमा दायर करने का प्रयास कर रहा है, जबकि 30 नवंबर 2024 को केवल एक मामूली विवाद हुआ था। छात्रों ने इसे व्यक्तिगत मतभेद के कारण की जा रही कार्रवाई बताया। वहीं, जितेंद्र भाटी ने सवाल उठाया था कि यदि एम्स प्रशासन आरोपी छात्रों को वकील उपलब्ध कराता है, तो उन्हें भी वकील मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह भी एम्स का छात्र है और लंबे समय से मानसिक, शैक्षणिक, शारीरिक और वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहा है। भाटी ने विश्वास व्यक्त किया कि एम्स प्रशासन किसी भी प्रकार का एकतरफा भेदभाव नहीं करेगा। इस सम्बंध में एम्स की कार्यकारी निदेशक डा. विभा दत्ता ने बताया कि छात्रों के बीच की लड़ाई उनका व्यक्तिगत मामला है। इसमें एम्स प्रशासन कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा।

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