शंकराचार्य-विवाद पर समर्थकों संग गोरखपुर से प्रयागराज निकले भाजपा पार्षद, करेंगे शांतिपूर्ण आंदोलन, बोले- 'संतों का अपमान बर्दाश्त नहीं'
रूरल न्यूज नेटवर्क। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए विवाद का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा
है। इसी कड़ी में गोरखपुर से भाजपा पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी अपने 10–12 समर्थकों के
साथ शनिवार को प्रयागराज के लिए रवाना हो गए। सभी समर्थक निजी साधनों से दोपहर करीब
3 बजे माघ मेला क्षेत्र के लिए निकले। समर्थकों का कहना है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
के साथ जो व्यवहार किया गया, वह निंदनीय है। उनका मानना है कि इस पूरे मामले के लिए
मेला और पुलिस प्रशासन को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
पूरा मामला
18 जनवरी को प्रयागराज
में एक तरफ जहां 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई, वहीं
दूसरी तरफ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ संगम नोज पर
स्नान के लिए जा रहे थे। लेकिन संगम से कुछ दूरी पहले ही मेला प्रशासन ने उनकी पालकी
को रोक दिया। इसके बाद पुलिस प्रशासन और शंकराचार्य के समर्थकों के बीच कहासुनी शुरू
हो गई, जो बाद में हाथापाई में बदल गई।
इस घटना से आहत होकर
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अनशन पर बैठ गए। शंकराचार्य का कहना है कि जब
तक सरकार की ओर से कोई जिम्मेदार अधिकारी उनसे माफी नहीं मांगेगा और सम्मान के साथ
उन्हें स्नान के लिए नहीं ले जाया जाएगा, तब तक वे अनशन जारी रखेंगे। यह मामला धीरे-धीरे
पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया और इसकी गूंज गोरखपुर तक पहुंची।
गोरखपुर से मिल रहा समर्थन
गोरखपुर से भाजपा पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी और उनके समर्थक शंकराचार्य के समर्थन में
सामने आए। शनिवार को सभी ने मिलकर फैसला लिया कि वे प्रयागराज जाकर शंकराचार्य से मुलाकात
करेंगे, उनका आशीर्वाद लेंगे और मेला क्षेत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात प्रशासन
के सामने रखेंगे।
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भाजपा पार्षद विश्वजीत
त्रिपाठी ने कहा- “भाजपा सरकार में संतों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार की उम्मीद नहीं थी।
हमारी पार्टी संतों को पूजने का काम करती है। मेरा पुलिस प्रशासन से यही कहना है कि
अभी भी देर नहीं हुआ है स्वामी से माफी मांगकर इस मामले को यहीं खत्म करे। मैं धन्यवाद
देता हूं यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का जिन्होंने ब्राह्मणों के समर्थन
में आए और महाराज से माफी मांगकर उनको स्नान करने के लिए कहा।”