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gorakhpur, cm yogi, Bodi, Rapti river 18-Apr-2026 12:43 PM

राप्ती नदी में उूबे 3 युवक के 18 घंटे बाद मिले शव, घर में मचा कोहराम

रूरल न्यूज नेटवर्क चिलुआताल थाना क्षेत्र के बंजरहा गांव के पास राप्ती नदी में नहाने गए तीन युवक डूब गए। घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए।

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ग्रामीणों ने बताया कि बरियारपुर निवासी शुभम यादव (19), अभय उर्फ बंटी (18) और काजीपुर के शिव साहनी (20) शुक्रवार को दोपहर में राप्ती नदी पर निर्माणाधीन पुल के पास नहाने गए थे। इसी दौरान गहरे पानी में जाने से तीनों डूब गए। घटना की सूचना पर पहुंचे मां-बाप अभी इसी उम्मीद में थे कि उनके बच्चे नदी से जिंदा बाहर आएंगे। शुक्रवार दोपहर 2:30 बजे तीनों दोस्त नहाते समय राप्ती नदी में डूबे थे। शनिवार सुबह करीब 18 घंटे बाद 8:30 बजे एनडीआरएफ ने तीनों का शव ढूंढकर बाहर निकाला। जिसके बाद मौके पर ही चीख पुकार मच गई। परिजन चिल्ला चिल्लाकर रोने लगे। चिलुआताल थाने की पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। बरियारपुर निवासी शुभम यादव (19) 12वीं का छात्र था। उसके पिता विनोद यादव शिक्षामित्र के पद पर कार्यरत हैं। परिवार ने बड़ी उम्मीदों के साथ उसे पढ़ाई और भविष्य संवारने के लिए हर संभव सहयोग दिया था। शुभम के दो भाई और एक बहन हैं। जैसे ही हादसे की सूचना घर पहुंची, मां-बाप और भाई-बहन बदहवास होकर नदी किनारे पहुंच गए और बार-बार उसका नाम पुकारते रहे। अभय उर्फ बंटी (18) पुत्र कृपा यादव 10वीं का छात्र था और महात्मा गांधी इंटर कॉलेज, गोरखपुर में पढ़ता था। उसके पिता मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बंटी परिवार की इकलौती संतान था, जिससे घर की पूरी दुनिया उसी पर टिकी थी। हादसे की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया।

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मां बेसुध होकर बार-बार यही कहती रहीं कि “अब हम किसके सहारे जिएंगे।” गांव के लोग परिवार को संभालने में जुटे रहे, लेकिन घर का हर कोना सन्नाटे में डूबा रहा।

शिव साहनी (20) पुत्र राम लखन 12वीं का छात्र था और महात्मा गांधी इंटर कॉलेज में अध्ययनरत था। वह अपने तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। उसके पिता पेंट-पॉलिश का काम कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।

शिव घर की जिम्मेदारियों का सहारा माना जाता था। हादसे के बाद पिता बार-बार नदी की ओर दौड़ते रहे। पिता का कहना था कि मेरा बेटा मर नहीं सकता है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। गांवों में लोग एक-दूसरे को सांत्वना देते नजर आए, लेकिन हर घर में गम और सन्नाटा पसरा हुआ है।

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