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gorakhpur, cm yogi, Boxer, motor mechanic 26-Mar-2026 04:21 PM

बाक्सर इंद्रजीत ऐसे बना मोटर मैकेनिक, रक्तदान से कर रहा समाजसेवा

रूरल न्यूज नेटवर्क। बाक्सिंग के क्षेत्र में स्कूली गेम्स से इंद्रजीत ने अपने खेल प्रदर्शन की शुरूआत की थी। उसने कभी सपने में न सोचा था कि उसका यह शौक एक दिन पेट की धधकती भूख की खातिर छूट जाएगा। जंगल सालिकराम के कलेक्ट्री टोला निवासी इंद्रजीत निषाद के पिता रामदयाल निषाद मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते थे। चार भाईयों में सबसे बड़े इंद्रजीत ने इस गरीबी में न केवल वर्ष 2016 में स्नातक की उपाधि हासिल की बल्कि राज्यस्तरीय बाक्सिंग चैंपियनशिप तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। विदित हो कि बचपन से ही इंद्रजीत मार्शल आर्ट के ओर आकर्षित होकर विभिन्न दांव पेंच में पारंगत हो चुका था। बस यहीं से इसका बाक्सिंग का सफर शुरू हुआ।

हाईस्कूल में शिक्षा के दौरान ही इंद्रजीत को कुशीनगर में आयोजित बाक्सिंग चैंपियनशिप में पहली बार प्रतिभाग करने का सुअवसर मिला। बस फिर क्या था उसने अपने बाक्सिंग प्रदर्शन से न केवल प्रतिभा का परिचय दिया बल्कि खूब वाहवाही भी बटोरी। इसके बाद स्कूली बाक्सिंग चैंपियनशिप यूपी टीम से झांसी में इंद्रजीत ने गोल्ड विजेता बनकर गोरखपुर का नाम रोशन कर दिखाया।

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वर्ष 2012 में स्कूली नेशनल टीम का आयोजन मध्यप्रदेश के बुरहान जिले में हुआ जहां इंद्रजीत ने अपनी सफलता का परचम लहराया। इसके बाद वर्ष 2012.13 में 58वीं प्रादेशिक मुक्केबाजी प्रतियोगिता में खेलप्रेमियों के दिलों को जीतकर अपने अभिभावक व कोच का नाम जगमग किया। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित आल इंडिया युनिवर्सिटी बाक्सिंग चैंपियनशिप में इंद्रजीत के बेहतर प्रदर्शन को खूब वाहवाही मिली। इसके अलावा इनकी प्रतिभा के कारण तमाम बार इन्हें आयोजन मंडल द्वारा रेफरी व जज की भूमिका का भी दायित्व सौंपा जा चुका है। 

 

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ऐसे बना मोटर मैकेनिक

रूरल न्यूज नेटवर्क से हुई विशेष बातचीत के दौरान बाक्सिंग चैंपियन इंद्रजीत ने संवाददाता को बताया कि आज खेल में असीम संभावनाएं सरकार दे रही है। हमारे खेल समय में यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार होती तो शायद मेरा झुकाव मोटर मैकेनिक की ओर न होता। हालांकि बचपन से ही आर्थिक परेशानियों को बहुत करीब से देखा है। इसलिए मोटर मैकेनिक की दुकान पर दिन में काम भी करता था। सुबह मार्शल आर्ट व बाक्सिंग के शौक पूरे करता था। रात में पढ़ाई  कर जीवन में कुछ अलग करने की तमन्ना दिल में थी। आज सरकार गोल्ड मेडल लाने पर नौ लाख की प्रोत्साहन राशि दे रही है। हम लोगों को शील्डए प्रशिस्त पत्रए टीशर्टए जूते.मोजे इत्यादि ही मिलते थे। जीविकोपार्जन के लिए कुछ करना ही था खेलने से कुछ हासिल न होता देख मैंने मोटर साइकिल रिपेयर का काम शुरू कर दिया।

 

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25 बार कर चुके रक्तदान

इंद्रजीत निषाद अब तक 25 बार खुद जरूरतमंदों को रक्तदान कर चुके हैं। चूंकि इनका ब्लड ग्रुप बी पाजिटिव है लेकिन कभी कभार ऐसे भी मरीज आने लगे जिन्हें अलग.अलग ग्रुप की आवश्यकता होती थी। ऐसे में इंद्रजीत ने मित्रों की मदद लेनी शुरू की। इंद्रजीत के इस हौसले को देखकर दोस्तों ने भी इनके इस मिशन में कंधे से कंधा मिलाकर चलना शुरू कर दिया। आज भी इनके ग्रुप में यदि कोई मैसेज आ जाए तो पूरी टीम रक्तदान के लिए तत्पर हो जाती है। टीम में विजेंद्रनाथ पाटिल, विशाल चौधरी, विजयनंद शाही, मंतोष कुमार सिंह आदि मित्रगण शामिल हैं।

 

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56 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडा

इंद्रजीत ने आरटीई के माध्यम से अब तक 56 बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा में शामिल कर चुके हैं। तमाम ऐसे बच्चे हैं जो आर्थिक अभाव के कारण पढाई से वंचित रह जाते हैं। इंद्रजीत ने ऐसे बच्चों को चिन्हित कर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया। बीएसए ने इस मुहिम में इंद्रजीत का भरपूर साथ देते हुए प्राइवेट विद्यालयों में आरटीई के तहत निःशुल्क प्रवेश कराकर बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा में शामिल किया।

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