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gorakhpur, cm yogi, City Hospital 02-Apr-2026 03:34 PM

सिटी हॉस्पिटल द्वारा वर्ल्ड ऑटिज़्म अवेयरनेस डे पर “राइड फॉर ऑटिज़्म” CSR पहल का सफल आयोजन, दिव्यांग बच्चों के लिए ₹1,27,080 की धनराशि प्रदान की

रूरल न्यूज नेटवर्क सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल प्रा. लि., गोरखपुर द्वारा अपने प्रथम कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहल के अंतर्गत वर्ल्ड ऑटिज़्म अवेयरनेस डे के अवसर पर “राइड फॉर ऑटिज़्म” कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. भूपेंद्र शर्मा (भूतपूर्व विभागाध्यक्ष बाल रोग विभाग, बीआरडी मेडिकल कॉलेज) द्वारा फ्लैग ऑफ कर की गई। इस अवसर पर उन्होंने ऑटिज़्म के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए समय पर पहचान, उचित देखभाल एवं जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डाला। फ्लैग ऑफ के पश्चात सभी प्रतिभागियों ने दो पहिया वाहनों पर सवार होकर सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल से प्रोविडेंस होम तक स्लो एवं अनुशासित राइड निकाली। इस राइड के माध्यम से मार्ग में आमजन के बीच ऑटिज़्म के प्रति जागरूकता का संदेश प्रसारित किया गया।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में ऑटिज़्म के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं विशेष बच्चों के प्रति संवेदनशीलता को प्रोत्साहित करना रहा। इस अवसर पर हॉस्पिटल के डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सिंग स्टाफ एवं प्रबंधन टीम ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस CSR पहल के अंतर्गत हॉस्पिटल द्वारा प्रोविडेंस होम, गोरखपुर में रह रहे ऑटिज़्म एवं दिव्यांग बच्चों के लिए ₹1,27,080 की धनराशि (Donation) प्रदान की गई, जिससे उनके देखभाल एवं पुनर्वास कार्यों में सहयोग मिल सके।

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मीडिया से बातचीत करते हुए डॉ. ए. के. मल्ल ने कहा, “यह पहल समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी का एक सार्थक प्रयास है। हम आगे भी ऐसे सामाजिक कार्यों के माध्यम से जरूरतमंदों की सहायता करते रहेंगे।”

डॉ. विमलेश कुमार पासवान ने कहा, “यह केवल शुरुआत है। हमारी CSR गतिविधियों के अंतर्गत भविष्य में और भी कई सामाजिक पहलें की जाएंगी, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।”

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डॉ. रविकेश द्विवेदी ने कहा, “ऑटिज़्म को समझना और समय पर पहचानना बेहद जरूरी है। इस तरह की पहल समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ एक सकारात्मक सोच विकसित करती है।”

डॉ. शिल्पा मल्ल ने कहा, “विशेष बच्चों के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग की भावना ही एक बेहतर समाज का निर्माण करती है। हमें सभी को मिलकर इनके साथ खड़े होने की आवश्यकता है।”

डॉ. अलका त्रिपाठी ने कहा, “समय पर हस्तक्षेप (Early Intervention) और सही मार्गदर्शन से ऑटिज़्म से ग्रसित बच्चों के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।”

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कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने समाज में जागरूकता फैलाने एवं ऐसे प्रयासों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ. ए. के. मल्ल, डॉ. शिल्पा मल्ल, डॉ. विमलेश पासवान, डॉ. रितेश कुमार सिंह डॉ. रविकेश द्विवेदी, डॉ. अलका त्रिपाठी, डॉ. विकास नारायण सिंह, डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. एस्सार खान, डॉ. जाहिरा खान, डॉ. वत्सल भूषण गुप्ता, मेजर डॉ. एम. क्यू. बैग, डीएनबी रेजिडेंट्स सहित सभी पैरामेडिकल, नर्सिंग एवं मैनेजमेंट स्टाफ ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

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