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Saturday, 16th May, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज सोमवार को सीएम योगी
पहुंचे। कॉलेज पहुंचते ही ढोल नगाड़े के साथ उनका स्वागत किया गया। उसके बाद
उन्होंने सबसे पहले दिग्विजयनाथ की मूर्ति पर माल्यार्पण किया।
डॉ. तेज प्रताप शाही कंप्यूटर लैब एंड रिसर्च सेंटर का
उद्घाटन किया। फिर स्मृति सभागार में पहुंचे। इस दौरान टीपी शाही को याद करते हुए
भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि टीपी शाही का एक दिन अचानक कॉल आया कि मैं लखनऊ में
मिलना चाहता हूं।
चूंकि मेरे कई कार्यक्रम लगे थे लेकिन मैंने समय बताया कि
उस समय मैं उपलब्ध रहूंगा। वो अपने दोनों बच्चों को लेकर आए। मैंने कहा-बच्चों से
गोरखपुर में ही मिल लेता तो उन्होंने कहा- मुझे कुछ आभास हुआ था। इसलिए अपने दोनों पुत्रों का परिचय कराने लाया हूं। मुझे
बाद में एक हफ्ते बाद जानकारी मिली कि उन्हें कोरोना हो गया है और वो नहीं रहे। यह
कहते हुए उनके आंख में आंसू आ गया।
वास्तव में व्यक्ति क्या है। हम उसके रहते हुए समझने का
प्रयास नहीं करते हैं। मैंने हरि शाही जी को तो नहीं देखा लेकिन उनके पुत्रों को
टीपी शाही जी को नजदीक से काम करते देखा है। कैसे समन्वय और संबंधों को कैसे बनाए
रखा जा सकता है। बता दें उस समय टीपी शाही गोरखपुर कांग्रेस के अध्यक्ष थे।
कांग्रेस की केंद्र में सरकार थी। एक समय राज्य और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। उस समय भी वह कांग्रेस से जुड़े थे लेकिन गोरक्षपीठ के अनन्य भक्त थे। मैं सांसद था तो मुझे एक बार कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिल्ली में मिले। एक प्रोग्राम के दौरान एक नेता मिले। केरल के वरिष्ठ सांसद थे, बाद में डिप्टी सीएम केरल भी बने। वो मेरे पास आए और उन्होंने कहा-तेज प्रताप शाही को जानते हैं। मैंने कहा- तेज प्रताप शाही के नाते ही कांग्रेस जीवित है। वे चुप हुए। उन्होंने कहा- आप जानते हैं कि आपके यहां से उनका संबंध है। मैंने कहा- आज से नहीं उनके पिता जी के समय से संबंध है। मैंने उनसे बाद में पूछा कि आपने क्यों ऐसा पूछा। उन्होंने कहा- मैं केवल ये जानना चाहता हूं कि कांग्रेस और गोरक्षपीठ के दो ध्रुव होने के बाद भी व्यक्ति दोनों के बीच संतुलन बनाता है। दूसरा वह व्यक्ति अपने विषय पर पूरी पकड़ रखता था।