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• gorakhpur, cm yogi, Cyber ​​fraud • गोरखपुर / चरगांवा • 25-03-2026

साइबर ठगी के गिरोह का पर्दाफाश, लोन दिलाने का देते थे झांसा, 7 गुर्गे गिरफ्तार, फर्जी मोहर व चेक आदि बरामद

रूरल न्यूज नेटवर्क एम्स थाना पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह में शामिल आरोपी लोगों को लोन दिलाने का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर उनके खाते खुलवाते। फिर उस खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी के रुपयों को ठिकाने लगाने के लिए करते थे। इतना ही नहीं उनके आधार कार्ड से नया सिम निकलवा कर साइबर फ्रॉड के लिए इस्तेमाल करते थे।

पुलिस ने मंलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरोह के 7 गुर्गों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। आगे की कार्रवाई जारी है। हर एंगल से जांच की जा रही है। उनके पास से 10 मोबाइल फोन, एक टैब, दो लैपटाप, आठ फर्जी मोहर, 28 साइनड चेक, चार पासबुक, तीन एटीएम कार्ड, दो चेक बुक बरामद किया गया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कैंट इलाके के सिंघड़िया निवासी ध्रुव साहनी, एम्स थान क्षेत्र के रजही जगदीशपुर निवासी सूरज सिंह, पिपराइच के पिपरा बसंत निवासी अजय उपाध्याय, देवरिया जिले के गौरी बाजार थाना क्षेत्र के असनहर निवासी अखंड प्रताप सिंह, मऊ जिले के गोपालपुर निवासी बृजेंद्र कुमार सिंह, बलिया जिले के हल्दी थाना क्षेत्र के बहादुरपुर निवासी अ​भिषेक कुमार यादव और एम्स इलाके के नीना थापा ​झरनाटोला निवासी अमर कुमार निषाद के रूप में हुई।

3 आरोपी वांछित

बृजेंद्र वर्तमान में एम्स इलाके के नीना थापा और अमर निषाद वाराणसी जिले के सारनाथ​ थाना क्षेत्र के सिंधौरा में रहता था। मामले में वाराणसी, भदोही और लखनऊ के तीन आरोपी वांछित हैं।

कई लोगों से यह उनके बैंक खाते भी मांग लेते और बदले में उनको कमीशन का लालच देते थे। इस गिरोह को चलाने वाला ध्रूव साहनी ही सभी गुर्गों को निर्देश देता था। उसे भी पुलिस ने पकड़ लिया है।

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शिक्षक का खाता फ्रीज हुआ तो खुला मामला

एम्स थाना क्षेत्र में लोन दिलाने के नाम पर टीचर्स कॉलोनी निवासी शिक्षक सुनील शर्मा से ठगी हो गई थी। जालसाजों ने सरकारी योजना का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लिए और उनके माध्यम से लाखों रुपये का साइबर फ्रॉड कर डाला। मामले की जानकारी तक हुई जब शिक्षक के खाते अचानक फ्रीज हो गए। ठगी के शिकार पीड़ित ने कैंट के सिंघड़िया आर्दशनगर निवासी ध्रुव साहनी, जंगल रामगढ़ उर्फ रजही निवासी सूरज के खिलाफ एम्स थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने जांच की तो गिरोह का पर्दाफाश हुआ।

10 लोगों को बनाया शिकार

पुलिस की जांच में अब तक ऐसे 10 लोग सामने आए हैं, जिनके खातों से आरोपियों ने लाखों रुपये की लेनदेन की है। इनमें कुछ के नए खाते खोले गए तो किसी के वर्तमान खाते का ही एक्सेस लेकर ट्रांजेक्शन किया है। बताया जा रहा है कि इस तरह के पीड़ित बड़ी संख्या में हैं। पुलिस उनकी जानकारी जुटा रही है।

​एसपी सिटी निमिष पाटिल ने बताया, गिरोह के सात गुर्गों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से मिले मोबाइल फोन और लैपटॉप से ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। तीन आरोपी वांछित हैं, जिनको जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

बैंकों से आसानी से लोन अप्रूव करवा देते थे

साइबर ठगी के रुपए ठिकाने लगाने वाले गिरोह के गुर्गे लोगों को लोन दिलाने का झांसा देते थे। इसके लिए वह फर्जी स्टांप और दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे, जिसके जरिए प्राइवेट और सरकारी बैंकों से आसानी से लोन अप्रूव करवा देते थे। आरोपियों के पास से पुलिस को आठ फर्जी मोहर भी मिले हैं। यह राजस्व विभाग और अन्य सरकारी विभागों के हैं। इसका इस्तेमाल वह भू-नक्शा बनाने के लिए भी करते थे। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि कहीं इसमें विभाग का कोई कर्मचारी तो शामिल नहीं।

लोगों के पासबुक, एटीएम कार्ड अपने पास ही रखते

दरसअल, गोरखपुर में ध्रूव साहनी ही गुर्गों को निर्देश देता था। सभी आरोपियों का काम बंटा हुआ था। कोई लोगों से दस्तावेज लेकर सिम निकालते और बाद में खाते खुलवाते। खाता खुलवाने के बाद उसका पासबुक, एटीएम कार्ड अपने पास ही रखते।

इसके बाद दूसरा आरोपी उसमें ठगी की रकम ट्रांसफर करता था। तीसरे का काम होता उस रकम को निकालकर बाहर भेजना। इसके लिए सभी का कमीशन तय था। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी को काम के हिसाब से सात से आठ प्रतिशत कमीशन मिलता था।

कई बार ये जिन लोगों के खाते इस्तेमाल करते उनको भी रकम का एक से दो प्रतिशत हिस्सा देते थे। आमतौर पर ये उन लोगाें को टारगेट करते थे जो लोन लेने की कोशिश कर रहे होते थे। ध्रूव को वाराणसी, भदोही और लखनऊ में बैठे मास्टरमाइंड से अपडेट मिलता था।

ट्रांजेक्शन हिस्ट्री खंगालेगी पुलिस

साइबर ठगी की रकम को खाते में मंगाने के बाद आरोपी उसे कैसे ठिकाने लगाते थे, पुलिस इसकी जांच कर रही है। हाल ही में खोराबार थाने में भी इससे जुड़ा एक मामला आया था जिसमें रुपये को क्रिप्टो में बदलकर विदेशों में भेजा जाता था। आशंका है कि इस मामले में भी रुयये को बाहर भेजा जा सकता है।

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