बेटी की मौत, 3 दिन बाद स्वस्थ होने का मैसेज आया, आयुष्मान रिकॉर्ड पर उठे सवाल, डिस्चार्ज दिखाया
रूरल न्यूज नेटवर्क।गोरखपुर में एक
निजी अस्पताल में 14 वर्षीय बच्ची
की मौत के बाद आयुष्मान भारत योजना से आए एक मैसेज ने पूरे मामले को संदेह के घेरे
में ला दिया है। कुशीनगर निवासी जयप्रकाश प्रजापति की बेटी राजनंदनी प्रजापति का
ऑपरेशन के बाद निधन हो गया था और परिवार उसका अंतिम संस्कार भी कर चुका था। इसके
बावजूद तीन दिन बाद पिता के मोबाइल पर आयुष्मान योजना का संदेश पहुंचा, जिसमें बच्ची को इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौटना बताया
गया और उपचार को लेकर फीडबैक मांगा गया। संदेश देखने के बाद परिवार ने अस्पताल और
पोर्टल पर दर्ज रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
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पित्त की पथरी के ऑपरेशन के
लिए कराया था भर्ती
कुशीनगर के फाजिलनगर
विकासखंड के सुमही बुजुर्ग गांव निवासी जयप्रकाश प्रजापति अपनी 14 वर्षीय बेटी राजनंदनी को पित्त की थैली में पथरी के इलाज के
लिए 23 मई को गोरखपुर के एक निजी
अस्पताल लेकर आए थे। परिवार का कहना है कि बच्ची को आयुष्मान कार्ड के जरिए भर्ती
कराया गया था और वह स्वयं चलकर अस्पताल पहुंची थी। 24 मई को उसका
ऑपरेशन किया गया। पिता का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद काफी देर तक अस्पताल प्रशासन
ने बच्ची की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं दी। बाद में उन्हें उसकी मौत की
सूचना दी गई। इसके बाद परिजन शव लेकर गांव लौट गए और अंतिम संस्कार कर दिया।
27 मई को आया
मैसेज, परिवार रह गया हैरान
परिजनों के अनुसार बेटी की
मौत के सदमे से परिवार अभी उबर भी नहीं पाया था कि 27 मई को आयुष्मान
भारत योजना से मोबाइल पर संदेश आया। संदेश में बताया गया कि राजनंदनी का इलाज पूरा
हो गया है और वह अस्पताल से घर लौट चुकी है। साथ ही उपचार संबंधी फीडबैक भी मांगा
गया था। जयप्रकाश का कहना है कि जिस बेटी का 24 मई को अंतिम
संस्कार कर दिया गया, उसे तीन दिन
बाद अस्पताल से डिस्चार्ज दिखाया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका आरोप है कि
यदि यह संदेश नहीं आता तो उन्हें रिकॉर्ड में संभावित गड़बड़ी की जानकारी भी नहीं
मिलती।
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डीएम, एसपी और सीएमओ से जांच की मांग
पीड़ित पिता ने डीएम, एसपी और सीएमओ को शिकायती पत्र देकर मामले की जांच कराने की
मांग की है। उनका कहना है कि बेटी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और मौत के बाद
भी आयुष्मान रिकॉर्ड में इलाज जारी या डिस्चार्ज क्यों दिखाया गया, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिवार ने अस्पताल की
भूमिका, आयुष्मान पोर्टल की एंट्री और उपचार से जुड़े
दस्तावेजों की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अस्पताल ने पोर्टल की
तकनीकी त्रुटि बताया
वहीं अस्पताल प्रबंधन का
कहना है कि बच्ची को 23 मई को भर्ती
किया गया था और ऑपरेशन के बाद उसकी हालत बिगड़ने से मौत हो गई थी। अस्पताल संचालक
के अनुसार मृत्यु की सूचना आयुष्मान पोर्टल पर भेज दी गई थी। उनका दावा है कि
स्वस्थ होकर घर लौटने वाला संदेश पोर्टल स्तर की तकनीकी त्रुटि के कारण जारी हुआ
है।
स्वास्थ्य विभाग ने जांच के
दिए निर्देश
राजेश झा ने कहा कि मामले
में लगाए गए आरोप गंभीर हैं। शिकायत मिलने के बाद जांच के निर्देश दिए गए हैं।
अस्पताल के रिकॉर्ड, आयुष्मान पोर्टल की एंट्री और पूरी उपचार प्रक्रिया
की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।