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Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। दीनदयाल उपाध्याय
गोरखपुर विश्वविद्यालय में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के लिए सिलेक्शन प्रोसेस शुरू
हो चुका है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और
यूजीसी की ओर से जारी दिशा निर्देशों के अनुसार शुरू किया गया।
इसमें विशेष रूप से मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर, फार्मेसी, जर्नलिज्म,
कॉमर्स और लॉ जैसे विषयों में शामिल किया जा रहा है। ताकि उद्योग, प्रशासन, उद्यमिता और पेशेवर क्षेत्रों के विशिष्ट अनुभव को सीधे क्लास तक लाया जा सके।
इसके लिए अपने क्षेत्र में 15 साल से ज्यादा एक्सपीरिएंस रखने
वाले स्पेशलिस्ट ही एलीजिबल होंगे। शुरुआत में उनकी नियुक्ति 1 साल के लिए की जाएगी आगे चलकर 3 साल के लिए बढ़ाई जा
सकती है।
क्या है क्राइटेरिया
इसके लिए ऐसे प्रतिष्ठित विशेषज्ञ एलीजिबल होंगे जिनके पास अपने क्षेत्र में
कम से कम 15 साल का अनुभव हो। इसके लिए औपचारिक शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं है।
किसी उच्च शिक्षण संस्थान में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की संख्या स्वीकृत पदों
के 10% से अधिक नहीं होगी।
उनका काम पाठ्यक्रम निर्माण, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना,
उद्योग-अकादमिक सहयोग विकसित करना, विशेष व्याख्यान,
कार्यशालाएं और संयुक्त शोध/परामर्श गतिविधियां संचालित करना होगा।
मानद आधार पर होगी नियुक्ति
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, पहले चरण में ‘प्रोफेसर
ऑफ प्रैक्टिस’ की नियुक्ति मानद (ऑनरेरी) आधार पर की जाएगी। इच्छुक और पात्र
विशेषज्ञों से नामांकन आमंत्रित किए जाएंगे, जिन
पर एक चयन समिति विचार करेगी और संबंधित वैधानिक निकाय अंतिम निर्णय लेंगे।
स्टूडेंट्स को मिलेगा पेशेवर
मार्गदर्शन
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा- यूजीसी दिशा-निर्देशों के अनुरूप ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की पहल से विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञ हमारे विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान, नवाचार दृष्टि और पेशेवर मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि यह पहल विश्वविद्यालय को अनुसंधान, परामर्श, स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध होगी। विश्वविद्यालय शीघ्र ही विस्तृत अधिसूचना जारी कर योग्य एवं विशिष्ट विशेषज्ञों से नामांकन आमंत्रित करेगा।