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Monday, 1st June, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। हिंदी पत्रकारिता के 200 साल पूरा होने पर गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब और
मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति,की ओर से
गोरखपुर प्रेस क्लब सभागार में "हिंदी पत्रकारिता : विरासत, संघर्ष और भविष्य" विषय पर एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन
किया गया।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों, वरिष्ठ पत्रकारों और बड़ी संख्या में मीडिया कर्मियों ने
भाग लिया। वक्ताओं ने हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास, उसके संघर्षों, वर्तमान
चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से अपने विचार रखे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश विधान परिषद के
सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने कहा कि 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने कलकत्ता से हिंदी के पहले
समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ का प्रकाशन कर हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी थी।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजी
शासन के दौरान अपनी भाषा में समाचार पत्र निकालना अत्यंत साहसिक कार्य था।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जिसकी
जिम्मेदारी केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज को
जागरूक करना, जनभावनाओं को सामने लाना और सत्ता को आईना
दिखाना भी है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी सच्चा पत्रकार अपने
कर्तव्यों से पीछे नहीं हटता।
प्रेस क्लब में डिजिटल
लाइब्रेरी की मांग
कार्यक्रम के दौरान प्रेस
क्लब अध्यक्ष ने पत्रकारों के अध्ययन और शोध के लिए प्रेस क्लब में डिजिटल
लाइब्रेरी स्थापित करने की मांग रखी।
इस पर मुख्य अतिथि कुंवर
मानवेन्द्र सिंह ने प्रस्तावित कक्ष का निरीक्षण किया और संबंधित प्रस्ताव तैयार
कर भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल लाइब्रेरी बनने से पत्रकारों को
आधुनिक संसाधनों और अध्ययन सामग्री की बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
प्रो. विश्वनाथ तिवारी ने
कहा- समाज की आवाज बनती है पत्रकारिता
मुख्य वक्ता पद्मश्री प्रो.
विश्वनाथ तिवारी ने कहा कि लेखक और पत्रकार दोनों समाज की संवेदनाओं को शब्द देने
का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि जो बातें समाज खुलकर नहीं कह पाता, उन्हें पत्रकार अपनी लेखनी के माध्यम से सामने लाता है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता
का जन्म ही संघर्ष की परिस्थितियों में हुआ और इसका उद्देश्य अभिव्यक्ति को स्वर
देना रहा है।
उन्होंने प्रेमचंद की
पत्रकारिता तथा ‘मर्यादा’ और ‘माधुरी’ जैसी पत्रिकाओं का उल्लेख करते हुए हिंदी
साहित्य और पत्रकारिता के गहरे संबंध को रेखांकित किया।
प्रो. तिवारी ने महात्मा
गांधी के ‘इंडियन ओपिनियन’, ‘यंग इंडिया’ और
‘नवजीवन’ जैसे प्रकाशनों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में
पत्रकारिता ने लोगों को जागरूक करने और आंदोलन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका
निभाई थी।
पत्रकार सुरक्षा कानून और
पेंशन व्यवस्था की उठी मांग
विशिष्ट अतिथि एवं पूर्वी
जर्नलिस्ट्स वर्किंग यूनियन, लखनऊ के
अध्यक्ष शिव शरण सिंह ने कहा कि सभी मीडिया संस्थानों को एक ही नजर से नहीं देखा
जाना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पत्रकार सुरक्षा
कानून बनाए जाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों
को बिना किसी दबाव के स्वतंत्र रूप से कार्य करने का माहौल मिलना चाहिए। साथ ही
उन्होंने पत्रकारों के लिए पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग करते हुए कहा कि इसका
लाभ मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त सभी पत्रकारों को मिलना चाहिए।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन
बोलीं- पत्रकारिता की गुणवत्ता उसकी स्वतंत्रता पर निर्भर
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर
रही दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि
पत्रकारिता की गुणवत्ता और विश्वसनीयता उसकी स्वतंत्रता पर निर्भर करती है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों
को सुरक्षित और स्वतंत्र वातावरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि वे निष्पक्ष और
निर्भीक होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
उन्होंने कहा कि वर्तमान
समय में पत्रकारिता तेजी से डिजिटल माध्यमों की ओर बढ़ रही है और बदलते दौर के साथ
पत्रकारों को नई तकनीकों को समझना और अपनाना होगा।
जमीनी खबरों से बनती है
पत्रकारिता की विश्वसनीयता
मान्यता प्राप्त पत्रकार
समिति, गोरखपुर के अध्यक्ष अरविंद राय ने कहा कि
पत्रकारों को अपने पेशे के प्रति पूरी ईमानदारी रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीनी
स्तर पर जाकर खबरें जुटाने और लिखने से ही पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि "खबर के साथ जीना और उसके प्रति
समर्पित रहना ही सच्ची पत्रकारिता की पहचान है।"
स्वतंत्र और संतुलित
पत्रकारिता पर दिया जोर
‘आज’ प्रेस के संपादक अखिलेश सिंह ने पत्रकारिता
की स्वतंत्रता की रक्षा पर जोर देते हुए कहा कि पत्रकारों को निष्पक्षता और संतुलन
बनाए रखते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए।
वहीं पूर्व संपादक जगदीश
लाल श्रीवास्तव ने हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि
पूर्वज पत्रकारों ने कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा और कभी
समझौता नहीं किया।
निर्भीक पत्रकारिता की
परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान
गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस
क्लब के संस्थापक अध्यक्ष एसपी त्रिपाठी ने कहा कि 1826 में शुरू हुई
हिंदी पत्रकारिता ने दो सौ वर्षों की यात्रा में अनेक चुनौतियों का सामना किया है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों को निर्भीक पत्रकारिता और प्रेस की स्वतंत्रता की
परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए।
कार्यक्रम का शुभारंभ
गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब के अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी के स्वागत संबोधन से
हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों और पत्रकारों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा
प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ
पत्रकार मुमताज खान ने किया। संगोष्ठी के अंत में सभी अतिथियों को अंगवस्त्र और
स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकारों
का भी सम्मान किया गया।
बड़ी संख्या में वरिष्ठ
पत्रकार रहे मौजूद
कार्यक्रम में प्रेस क्लब के संस्थापक सदस्य श्रीकिशन त्रिपाठी, एसपी सिंह, पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी, रितेश मिश्र, सफी आजमी सहित अनेक पूर्व पदाधिकारी, वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया कर्मी उपस्थित रहे।