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gorakhpur, cm yogi, City Super Speciality, Hospital 11-Mar-2026 02:04 PM

सिटी सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल के डाक्टरों ने बचाई 14 महीने के बच्चे की जान, ढाई इंच का स्क्रू निगला था, 24 घंटे तक किया लाइव एक्सरे, एंडोस्कोपी से 30 मिनट में स्क्रू निकाला

रूरल न्यूज नेटवर्क सिद्धार्थनगर में खेलते समय 14 महीने के एक मासूम ने 2.5 इंच का नुकीला स्क्रू निगल लिया। इसके बाद बच्चा जोर-जोर से रोने लगा। रोने की आवाज सुनकर मां पहुंची और उसे चुप कराने की कोशिश की, लेकिन बच्चा और बेचैन हो गया। इसके बाद पिता ने मेडिकल स्टोर से दवा लाकर खिला दी। जिससे थोड़ी देर के लिए बच्चा शांत हुआ, लेकिन कुछ ही देर बाद फिर तेज रोने लगा। इसके बाद परिजन उसे डॉक्टर के पास ले गए।

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जांच के बाद डॉक्टर ने बच्चे को गोरखपुर रेफर कर दिया। वहां एक्स-रे में पता चला कि स्क्रू आंत के निचले हिस्से तक पहुंच चुका है। डॉक्टरों ने बच्चे को 24 से 48 घंटे निगरानी में रखा। इसके बाद करीब 30 मिनट की एंडोस्कोपी प्रक्रिया से स्क्रू को निकाल लिया।

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सिद्धार्थनगर के पशुपतिनाथ दुबे ने बताया कि उनका 14 महीने का बेटा गर्वित है। चार दिन पहले वह अचानक रोने लगा। वह लगातार चिल्ला रहा था। हमें लगा कि पेट में दर्द है।


पहले उसे चुप कराने की कोशिश की। लेकिन वह शांत नहीं हुआ। इसके बाद वह मेडिकल स्टोर गए। वहां से बच्चे के लिए दवा लेकर आए। दवा पिलाने के बाद बच्चा कुछ देर शांत रहा।

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करीब एक घंटे बाद वह फिर रोने लगा। शाम को उसे सिद्धार्थनगर के एक डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर ने जांच की। इसके बाद बच्चे को गोरखपुर के चरगांवा स्थित सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल रेफर कर दिया।

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फट सकती थी बच्चे की आंत

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. विवेक मिश्रा ने बताया- सिद्धार्थनगर के 14 महीने के बच्चे को गंभीर हालत में सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल लाया गया। बच्चा करीब 100 किलोमीटर दूर से आया था। वह देर रात करीब 2 बजे अस्पताल पहुंचा। उसकी हालत गंभीर थी। सूचना मिलते ही मेडिकल टीम पहले से तैयार थी। बच्चे का तुरंत एक्स-रे कराया गया। एक्स-रे में 2.5 इंच लंबा नुकीला स्क्रू दिखाई दिया, जो पेट से आगे आंतों की ओर बढ़ चुका था।

डॉक्टर के मुताबिक, यह बेहद खतरनाक स्थिति थी। स्क्रू के नुकीले किनारे आंत में छेद कर सकते थे। इससे संक्रमण फैलने या आंत फटने का भी खतरा था।

पेडियाट्रिक एंडोस्कोपी से स्क्रू निकाले की कोशिश

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. विवेक मिश्रा ने बताया- सबसे पहले पेडियाट्रिक एंडोस्कोपी से स्क्रू को निकालने की कोशिश गई। इस प्रोसेस में पूरी मेडिकल टीम ने मिलकर रात करीब 2:15 बजे इमरजेंसी में एंडोस्कोपी की।

जांच के दौरान इसोफेगस, पेट और छोटी आंत के शुरुआती हिस्से तक निरीक्षण किया गया, लेकिन स्क्रू वहां नहीं दिखाई दिया। फ्लोरोस्कोपी (लाइव एक्स-रे) से पुष्टि हुई कि स्क्रू आंत में आगे बढ़ चुका है। इसके बाद बच्चे को निगरानी में रखने का निर्णय लिया गया।

हर चार घंटे पर किया गया एक्स-रे

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. विवेक मिश्रा ने बताया- बच्चे को पीडियाट्रिक यूनिट में भर्ती किया गया। 24 से 48 घंटे के बीच हर 4 घंटे में सीरियल एक्स-रे से निगरानी की गई। जब स्क्रू टर्मिनल इलियम के पास जाकर रुक गया और आगे बढ़ना बंद हो गया। तब स्थिति को देखते हुए बड़े ऑपरेशन से बचाने के लिए कोलोनोस्कोपी करने का निर्णय लिया।

कोलोनोस्कोपी के दौरान पूरे कोलन की जांच की गई और टर्मिनल इलियम में एंट्री कर स्क्रू मल में फंसा हुआ दिखाई दिया। इसके बाद सोमवार की सुबह एंडोस्कोपिक टूल्स से स्क्रू को बाहर निकाल लिया गया।

इस पूरे प्रोसेस में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. विकास नारायण सिंह, ओटी असिस्टेंट प्रिंस गुप्ता, हृदय दुबे, किशन सहित अन्य स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

डॉ. विवेक मिश्रा ने बताया कि बच्चों में फॉरेन बॉडी निगलने के कई जटिल मामलों को एंडोस्कोपी से संभाला गया है। इस तरह के नुकीले स्क्रू बेहद जोखिम भरे होते हैं क्योंकि यह आंतों को किसी भी स्थान पर छेद कर सकते हैं, जो जानलेवा हो सकते हैं।

डॉक्टरों की सलाह

यदि किसी बच्चे के द्वारा गलती से सिक्का, बैटरी, स्क्रू या कोई अन्य वस्तु निगल ली जाए तो तुरंत अस्पताल में जांच करानी चाहिए। घरेलू उपाय जैसे तेल पिलाना, केला खिलाना आदि से बचना चाहिए। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है।

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