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• gorakhpur, cm yogi, cold day, Environmental, friendly, seed paper • गोरखपुर / चरगांवा • 05-02-2026

इनवायरमेंट फ्रेडली ‘सीड पेपर' करेगा कमाल, गोरखपुर में हुआ एक्सपेरिमेंट, कागज से उगेंगे पौधे

रूरल न्यूज नेटवर्क। गोरखपुर के डीडीयू यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में एक इनवायरमेंट फ्रेडलीसीड पेपर' तैयार किया गया है। जिससे एक तरफ ग्रीटिंग, इनविटेशन कार्ड या किसी भी यूज किए कागज का बेहतर इस्तेमाल होगा और दूसरी तरफ नेचर के लिए भी फायदेमंद रहेगा।

इस पेपर के अंदर बीज होंगे जो मिट्टी और नमी के संपर्क में आने के बाद पौधे को जन्म देंगे। यह सीड पेपर डिपार्टमेंट की डॉ. ऐमन तनवीर और डॉ. सुप्रिया गुप्ता ने प्रोफेसर दिनेश की मदद तैयार किया है।

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टमाटर और मिर्ची के बीज से टेस्ट किया

डॉ. ऐमन तनवीर ने बताया- इस पेपर में हमने अभी हमने टमाटर और मिर्ची के बीज से टेस्ट किया है। आगे तुलसी और अन्य बीजों पर एक्सपेरिमेंट करेंगे। यह सीड पेपर इंसान को प्रकृति से इमोशनली कनेक्ट करेगा।

केमिकल फ्री है यह 'सीड पेपर' उन्होंने बताया- पर्यावरण को सुरक्षित करने, वेस्ट मटेरियल को रियूज और सस्टेनबल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हमने यह प्रयोग किया है। इस पेपर को बनाने के लिए हम रद्दी, गन्ने का बगास और गेहूं की भूसी का इस्तेमाल कर उसकी उपयोगिता बढ़ाएंगे।

इसमें एक खास एंजाइम होता है, जो सीड को खराब नहीं होने देता। साथ ही पेपर को इको फ्रेंडली बनाने के लिए किसी भी तरह का केमिकल का इस्तेमाल भी नहीं किया जाता है।

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यादों को संजोएगा सीड पेपर

उन्होंने बताया- इस पेपर के जरिए हम खास लोगों की यादों को वर्षों के लिए संजों सकते हैं। जैसे कोई हमें ग्रीटिंग कार्ड, इनविटेशन कार्ड या लेटर देता है तो कुछ समय बाद वह जरूर खराब हो जाता है। फिर उसे फेंकना ही पड़ता है।

या फिर अगर नहीं फेंकते तो वैसे ही पड़ा रहता है। ऐसे कागजों का सीड पेपर बना कर उसका बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं। इस सीड पेपर से पौधे निकलेंगे जिससे अलग ही जुड़ाव होगा और प्रकृति के लिए भी लाभदायक होगा।

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सामान्य बीज अंकुरित होने जितना लगता समय

डॉ. तनवीर के हिसाब से इस सीड पेपर से बीज अंकुरित होने में उतना ही समय लगता है, जितना सामन्य बीजों के अंकुरण में लगता है। खास बाद यह है कि इसे बोना भी आसान है। बस पेपर के टुकड़ें किए और मिट्टी के अंदर दबा दिया।

वेस्ट वॉटर भी सुरक्षित डॉ. तनवीर ने बताया, इस पेपर को बनाने के दौरान निकलने वाला वेस्ट वॉटर भी बिल्कुल सुरक्षित है। इसका भी PH मान चेक किया गया है, जो सामान्य प्रदूषित पानी से काफी कम है।

पेटेंट फाइल किया गया इस तकनीक की उपयोगिता और मौलिकता को देखते हुए इसके लिए पेटेंट भी दाखिल किया गया है। यह रिसर्च वर्क DST वुमेन साइंटिस्ट प्रोजेक्ट के अंतर्गत किया गया है।

आने वाले समय में यह सीड पेपर बड़े पैमाने पर उत्पादित किया जा सकता है और इससे सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार और स्टार्ट-अप के अवसर भी पैदा होंगे।

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