वॉशरूम का बदबू ऑफिस तक पहुंचा, GDA टॉवर में रहना मुश्किल, कई महिलाएं बीमार
रूरल न्यूज नेटवर्क। गोरखपुर के गोलघर स्थित GDA टॉवर में इन
दिनों सबसे बड़ी समस्या गंदगी और पानी सप्प्लाई की है। पिछले तमाम शिकायतों के बाद
अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ। वाशरूम की जर्जर और बत्तर स्थिति से वहां के
दुकादारों और ऑफिस वालों को इंफेक्शन का डर सता रहा है।वाशरूम का बदबू ऑफिस और दुकानों तक पहुंच रही है। सबसे
ज्यादा दिक्कत यहां काम करने वाली लड़कियों और महिलाओं को रही है। कई महिलाएं
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की शिकार हो गई हैं। उनका बकायदा इलाज चल रहा है। करीब
दो महीने से पानी न आने की वजह से वाशरूम साफ नहीं हो पाया है।उनका कहना है कि हमें मजबूरी बस इस गंदे टॉयलेट का इस्तेमाल
करना पड़ता है। नहीं तो लंबे समय तक नेचर कॉल कंट्रोल करना पड़ता है। महीनों से पानी
और गंदगी की समस्या बनी हुई है। कोई सुनने वाला नहीं है। शुरुआत में तो बिना सफाई
के काम चल जा रहा था। अब तो बर्दाश्त के बाहर है।उन्होंने बताया कि वहीं कुछ फ्लोर पर बीयर और शराब की बोलते
इधर- उधर पड़ी रहती है। ऐसा लगता है कि हम किस असुरक्षित जगह पर आ गए हैं। काम करना
मजबूरी न होता तो यहां कभी नहीं आते।
15 दिन तक एडमिट
थी श्वेता
ग्राउंड फ्लोर पर स्पाइस
एंड बाइट रेस्टोरेंट पर काम करने वाली श्वेता ने बताया कि पिछले करीब 3 महीने से यहां पानी का सप्लाई बंद है। जिससे सफाई करना
मुश्किल हो गया है। न तो वाशरूम साफ हो पा रहा है और न ही दुकान के आसपास का
एरिया। गंदे वाशरूम को इस्तेमाल करते- करते मुझे इंफेक्शन हो गया था। 15 दिनों तक एडमिट थी। अब जब फिर काम पर लौटी हूं तो डर लगा
रहा है कि फिर से दिक्कत न बढ़ जाए।
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन
से ग्रसित हुई लड़कियां
फर्स्ट फ्लोर पर पेंटिंग का
काम करने वाली स्निहिला द्विवेदी ने बताया कि पिछले 3 साल से मैं GDA में काम करती
हूं। वाशरूम की समस्या हमेशा से रही है। लेकिन इस टाइम तो इतनी ज्यादा है कि मेरे
पास काम करने वाली कई लड़कियां यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन से ग्रसित हो गई।
हमने कई बार इसकी शिकायत की
है लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ। पहले GDA के पास था तब
तक फिर भी ठीक था। अब नगर निगम के अंडर आ रहा है। कोई अधिकारी सुनने वाला नहीं है।
बाहर पैसे देकर
टॉयलेट इस्तेमाल करते
फर्स्ट फ्लोर पर टूर एंड
ट्रेवल्स की ऑफिस में काम करने वाली वर्षा ने बताया कि यहां पर वाशरूम की समस्या
कम से कम 2 महीने से है। सबसे ज्यादा दिक्कत फीमेल स्टाफ को
होती है। हमें बहुत ज्यादा मैनेज करना पड़ता है।इतना ही नहीं हम पैसे देकर बाहर चटोरी गली या सिटी मॉल के
पास का टॉयलेट इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। लेकिन बार- बार काम छोड़ कर उतना दूर
जाना हमारे लिए आसान नहीं है। हर जगह गंदगी फैली हुई है।
कस्टमर्स दुकान पर रुकना
नहीं चाहते
लिटिल हांगकांग रेस्टोरेंट
में काम करने वाली संजू प्रजापति ने बताया कि वाशरूम को लेकर बहुत समस्या हो रही
है। ऊपर से लेकर नीचे तक कहीं भी हालत ठीक नहीं है। हमें बाहर पैसे देकर जाना पड़ता
है।
10 घंटे की ड्यूटी में कम से
कम 7 से 8 बार बाहर जाना
बहुत मुश्किल होता है। दूसरी तरफ बदबू अब दुकान तक आ गई है। जिससे ग्राहक भी
परेशान होते हैं। कस्टमर्स दुकान पर रुकना नहीं चाहते।
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जनवरी से ही टूटा है
सेंकेंड फ्लोर का वाशरूम
सेंकेंड फ्लोर पर स्थित
फाइव टेक इंटरनेशनल के ऑफिस में काम करने वाली प्रिया का कहना है कि यहां पर
वाशरूम की प्रॉब्लम बहुत ज्यादा है। जनवरी से ही इस फ्लोर का वाशरूम तोड़ दिया गया
है। उसके बाद से ही हम इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। कब तक ठीक होगा कुछ पता नहीं है।
उन्होंने बताया कि दूसरी
सबसे बड़ी समस्या यहां बीयर और शराब की है। कहीं पर भी बॉटल गिरे पड़ें हुए मिलते
हैं। ये सब देखर हम बहुत ज्यादा असुरक्षित महसूस करते हैं। देख कर डर लगता है कि
कैसे जगह काम करना पड़ रहा है।
कस्टमर्स दुकान
पर रुकना नहीं चाहते
लिटिल हांगकांग
रेस्टोरेंट में काम करने वाली संजू प्रजापति ने बताया कि वाशरूम को लेकर बहुत
समस्या हो रही है। ऊपर से लेकर नीचे तक कहीं भी हालत ठीक नहीं है। हमें बाहर पैसे
देकर जाना पड़ता है।
10 घंटे की ड्यूटी में कम से
कम 7 से 8 बार बाहर जाना
बहुत मुश्किल होता है। दूसरी तरफ बदबू अब दुकान तक आ गई है। जिससे ग्राहक भी
परेशान होते हैं। कस्टमर्स दुकान पर रुकना नहीं चाहते।
घंटों तक करते कंट्रोल, बीमारी बढ़ने का डर
सेकेंड फ्लोर पर काम करने
वाली अर्चना गिरी ने बताया कि वाशरूम में पानी न आने की वजह से बहुत ज्यादा गंदगी
फैली हुई है। बीमारियां भी फैल रही है। कई लोग बीमार हुए। 15 से 20 दिनों तक एडमिट होकर आए
हैं।अधिकतर टाइम हमें घंटों तक नेचर कॉल कंट्रोल करना
पड़ता है। हालांकि इससे भी बीमारी बढ़ती है , जिसका डर लगा रहता है।
नहीं तो बाहर जाना पड़ता है। कम्प्लेट होने पर भी कुछ नहीं हुआ।