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Wednesday, 10th June, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। गोरखपुर में ईद-उल-अजहा को लेकर शुक्रवार को मस्जिदों में
जुमा की तकरीर के दौरान कुर्बानी की अहमियत, उसके मसाइल और
साफ-सफाई को लेकर लोगों को जागरूक किया गया। उलेमाओं ने लोगों से अपील की कि
त्योहार को अमन, भाईचारे और जिम्मेदारी के साथ मनाएं। साथ ही कुर्बानी के दौरान स्वच्छता बनाए रखने, प्रशासन का सहयोग करने और सोशल मीडिया पर फोटो-वीडियो साझा
करने से बचने की सलाह दी गई।
साफ-सफाई और
प्रशासन के सहयोग की अपील की
शहर काजी
मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि ईद-उल-अजहा का त्योहार शांति और उत्साह के
साथ मनाया जाए। कुर्बानी के स्थानों पर पर्दे की व्यवस्था की जाए और खून, हड्डी व अन्य अपशिष्ट खुले में न फेंककर गड्ढे में दफन किए
जाएं। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
साथ ही लोगों से प्रशासन का
सहयोग करने और गरीबों का खास ख्याल रखने की अपील की। उन्होंने बताया कि कुर्बानी 28, 29 और 30 मई तक की
जाएगी। कुर्बानी से जुड़े मसाइल के लिए शहर काजी, मुफ्ती-ए-शहर
अख्तर हुसैन मन्नानी और कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी से संपर्क किया जा सकता है।
कुर्बानी त्याग और नेकी का
पैगाम
हजरत मुकीम शाह
मस्जिद बुलाकीपुर के इमाम मौलाना फिरोज अहमद ने कहा कि कुर्बानी त्याग, सेवा और अल्लाह की राह में खर्च करने का पैगाम देती है।
उन्होंने कहा कि कुर्बानी का जानवर कयामत के दिन अपने सींग, बाल और खुरों के साथ आएगा और इंसान के लिए सवाब का जरिया
बनेगा।
उन्होंने हदीस का हवाला देते हुए कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कुर्बानी को हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सुन्नत बताया है और इसके हर बाल के बदले नेकी मिलने की बात कही है।