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गोरखपुर / चरगांवा
• 13-04-2026
ड्रोसोफिला से लेकर ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर तक, DDU के जूलॉजी डिपार्टमेंट में 5 रिसर्चर को UP सरकार से 12 लाख का अनुदान मिला
रूरल न्यूज नेटवर्क।दीनदयाल
उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के जूलॉजी डिपार्टमेंट में 5 शोधकर्ताओं को उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग (UPHED) से इनोवेटिव रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए लगभग 12 लाख रुपए का अनुदान मिला है।
इन प्रोजेक्ट्स में
ड्रोसोफिला (फल मक्खी) जैसे सूक्ष्म जीवों से लेकर ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर
जैसी जटिल बीमारी तक के अध्ययन शामिल हैं। यह अनुदान विभाग की शोध क्षमता को नई
ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक होगा।इससे पहले भी
दो रिसर्चर को पिछले साल यूपी सरकार के इस विभाग की ओर से अनुदान मिल चुका है।
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पाने शिक्षक और उनके रिसर्च
प्रोजेक्ट्स
डॉ. महेन्द्र प्रताप सिंह–
“पूर्वांचल क्षेत्र के वनस्पतियों का एथनोफार्माकोलॉजिकल मूल्यांकन
ग्रीन-सिंथेसाइज्ड नैनोकणों का उपयोग करके वाइल्डटाइप ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर
(ओरेगॉन R⁺) पर”, डॉ. सुशील
कुमार– “डायमंड बैक मॉथ (प्लूटेला जाइलोस्टेला) के नियंत्रण में पादप-आधारित जैव कीटनाशकों एवं सिंथेटिक कीटनाशकों का तुलनात्मक
मूल्यांकन”, डॉ. सुनील कुमार सिंह– “जलीय मछली चन्ना
पंक्टेटस पर फाइटो कीटनाशकों का विषाक्त प्रभाव”, डॉ. सुनैना
गौतम– “टाइप 2 मधुमेह मेलिटस में न्यूरोप्रोटेक्शन हेतु
सिग्नलिंग पाथवे को नियंत्रित करने में फिकस रिलीजियोसा की चिकित्सीय क्षमता की
खोज: एक मॉडल जीव दृष्टिकोण”; डॉ. मनीष
प्रताप सिंह– “एनजीएस एवं ओमिक्स विश्लेषण के माध्यम से बीआरसीए-संबद्ध ट्रिपल
नेगेटिव स्तन कैंसर में नए बायोमार्कर और चिकित्सीय लक्ष्यों की पहचान।” इसके अलावा विभाग की डॉ. स्मिता सिंह और डॉ. अरुन्धति सिंह
को पिछले साल भी यूपीएचईडी से शोध अनुदान प्राप्त हुआ था, जो विभाग की निरंतर शोध उत्कृष्टता को दर्शाता है।
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कुलपति ने दी बधाई
इस अवसर पर
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने प्राणी विज्ञान विभाग के शिक्षकों को
बधाई देते हुए कहा कि ड्रोसोफिला जैसे मॉडल जीवों से लेकर ट्रिपल नेगेटिव स्तन
कैंसर जैसे गंभीर रोग तक के शोध क्षेत्रों में हमारे प्राणी विज्ञान विभाग के
शिक्षक अभूतपूर्व कार्य कर रहे हैं।
लगभग 12 लाख रुपये का यह अनुदान उनकी मेहनत और शोध की गुणवत्ता का
प्रमाण है। ये परियोजनाएं न केवल वैज्ञानिक जिज्ञासा को संतुष्ट करेंगी बल्कि समाज
के लिए ठोस समाधान भी प्रस्तुत करेंगी। मैं सभी अनुदान प्राप्तकर्ताओं को हार्दिक
शुभकामनाएँ देती हूं।
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डीन ने जाहिर की खुशी
साइंस फैकल्टी
के डीन प्रो. अजय सिंह ने कहा, पिछले साल दो
और इस साल पांच शिक्षकों को यूपीएचईडी से लगभग 12 लाख रुपये का
अनुदान मिलना विभाग की शोध संस्कृति का प्रमाण है।
मुझे पूरा विश्वास है कि ये
परियोजनाएं सतत कीट प्रबंधन, जलीय जीव
संरक्षण, न्यूरोप्रोटेक्शन और कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र
में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।विश्वविद्यालय
प्रशासन ने सभी शोधकर्ताओं को बधाई दी है और यूपीएचईडी योजना के तहत अनुसंधान को
प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग के
दो प्राध्यापकों की शोध परियोजनाओं को स्वीकृति
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर
विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के लिए गौरव का विषय है कि विभाग के दो
प्राध्यापकों को उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग की ओर से शोध एवं विकास कार्यों
के लिए लगभाग राशि 5 लाख की शोध
परियोजनाओं को स्वीकृति प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि विभाग की शोध क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा नवाचार के क्षेत्र में निरंतर
प्रगति को दर्शाती है।
विभाग के प्रो. शरद कुमार
मिश्रा की शोध परियोजना “आर्सेनिक-प्रतिरोधी पादप वृद्धि प्रोत्साहक जीवाणुओं का
जैव-अन्वेषण, आणविक अभिलक्षणन एवं सतत कृषि में उनका उपयोग” को
स्वीकृति प्रदान की गई है। यह परियोजना आर्सेनिक-प्रतिरोधी लाभकारी जीवाणुओं की
पहचान, उनके आणविक स्तर पर अध्ययन तथा सतत कृषि में उनके
उपयोग की संभावनाओं पर केंद्रित है, जिससे कृषि उत्पादन एवं
पर्यावरण संरक्षण दोनों को लाभ मिल सकेगा।इसी
क्रम में विभाग के डॉ. पवन कुमार दोहरे की शोध परियोजना “सहजन (Moringa oleifera) की पत्तियों एवं बीजों में उपस्थित जैव सक्रिय
यौगिकों की पहचान, जो मधुमेह-रोधी गुणों के लिए उत्तरदायी हैं:
स्ट्रेप्टोजोटोसिन (STZ) प्रेरित विस्टार माउस
मॉडल पर अध्ययन” को भी स्वीकृति प्राप्त हुई है। यह परियोजना सहजन में उपस्थित
औषधीय तत्वों की पहचान एवं उनके मधुमेह नियंत्रण में संभावित उपयोग के वैज्ञानिक
अध्ययन पर आधारित है।
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