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• gorakhpur, cm yogi, GDA • गोरखपुर / चरगांवा • 27-05-2026

वैदिक सिटी के लिए लैंड पुलिंग भी करेगा GDA, उपाध्यक्ष ने परियोजना स्थल का निरीक्षण किया, 622 एकड़ में होगा विकास

रूरल न्यूज नेटवर्क नया गोरखपुर के तहत शहर के उत्तर दिशा में गुरुकुल सिटी आकार लेगी तो पूर्वोत्तर दिशा में कुशीनगर रोड पर वैदिक सिटी की योजना बनाई गई है। मंगलवार को गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने वैदिक सिटी के लिए प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया। यहां तीन गांवों-माड़ापार (चौरीचौरा तहसील), सदर के तकिया मेदनीपुर व कोनी में लगभग 622 एकड़ जमीन ली जानी है। जमीन लेने के लिए किसानों से बातचीत के साथ अनिवार्य अर्जन का रास्ता भी अपनाया जा रहा है। इसके साथ ही उपाध्यक्ष ने लैंड पुलिंग का विकल्प भी दिया है। इसके जरिए भी जमीन ली जाएगी।

GDA उपाध्यक्ष ने प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह के साथ तीनों गांवों का निरीक्षण किया। प्राधिकरण की ओर से अनिवार्य अर्जन का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। लेकिन प्राधिकरण किसानों से बात करके जमीन लेने का प्रयास करेगा, जिससे ज्यादा समय न लगे। इसके लिए लैंड पुलिंग बेहतर विकल्प हो सकता है। इसमें लगभग एक चौथाई जमीन विकसित करके किसानों को उनके उपयोग के लिए दे दी जाएगी। मुख्यमंत्री शहरी विस्तार योजना के तहत विकसित होने वाली वैदिक सिटी लगभग 622 एकड़ में विकसित होगी। इसके लिए माड़ापार में 373.62 एकड़, तकिया मेदनीपुर में लगभग 109 एकड़ और कोनी में लगभग 140 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है।

प्राधिकरण की यह योजना भारतीय परंपरा और आधुनिक शहरी ढांचे के मिश्रण के रूप में दिखेगी। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका रेडियल यानी वृत्तीय प्लानिंग माडल होगा, जो वैदिक अवधारणा ‘नंद्यावर्त’ से प्रेरित है। इस माडल में शहर के केंद्र से चारों दिशाओं में सड़कें विकसित होंगी, जिससे आवाजाही आसान होगी और दूरी कम तय करनी पड़ेगी।

वैदिक सिटी में सार्वजनिक परिवहन और पैदल आवागमन को बढ़ावा देने की भी योजना है। निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने के लिए प्रोत्साहन आधारित सुविधाओं पर विचार किया जा रहा है। इनमें सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और रूफटाप सोलर पैनल लगाने वालों को बिजली क्रेडिट जैसे लाभ शामिल हो सकते हैं।

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परियोजना में वैदिक (नक्षत्र) उद्यान, औषधीय पौधों की प्रदर्शनी, पौधशाला और वैदिक ज्ञान पर आधारित वैश्विक विचार केंद्र भी विकसित करने की तैयारी है। इसके अलावा गोरखपुर, नेपाल और आसपास के क्षेत्रों के हस्तशिल्प तथा पारंपरिक उत्पादों के लिए विशेष क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय कारीगरों को बाजार और पहचान मिल सके।

GDA उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने कहा कि नया गोरखपुर के लिए भूमि जल्द जुटाने के लिए लैंड पूलिंग के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार करने के निर्देश दिए गए हैं। वैदिक सिटी गोरखपुर के शहरी विकास को नई दिशा देने के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना आधुनिक सुविधाओं के साथ भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखेगी।

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