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gorakhpur, cm yogi, cold day, Golden, student, UGC rule, memorandum 27-Jan-2026 05:26 PM

UGC नियम पर स्वर्ण छात्रों ने किया विरोध, सौंपा खून से लिखा ज्ञापन, “काला” बताते हुए कानून वापस लेने की मांग

रूरल न्यूज नेटवर्क। गोरखपुर में UGC द्वारा लाए गए नए नियम के विरोध में श्रवण समाज के सैकड़ों छात्रों ने दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर प्रदर्शन किया। छात्रों ने नियम कोकालाबताते हुए तत्काल वापसी की मांग की और इसी संबंध में राष्ट्रपति को खून से लिखा ज्ञापन सौंपा।

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प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय गेट कई घंटों तक बंद रहा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। विरोध सुबह 12 बजे के आसपास शुरू हुआ और दोपहर तक जारी रहा, जिससे परिसर और आसपास के मार्ग प्रभावित हुए।

गेट बंद रहने से आवागमन बाधित गोरखपुर विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार के बंद रहने से छात्रों, कर्मचारी और अभिभावकों को प्रवेश में दिक्कत हुई। परिसर में आने-जाने वालों को पुलिस और सुरक्षा कर्मियों से संवाद कर प्रवेश लेना पड़ा। विरोध के दौरान छात्र नारेबाज़ी करते रहे और UGC नियम को शिक्षा में अवरोधक बताने की बात दोहराते रहे।

राष्ट्रपति को खून से लिखा ज्ञापन सौंपा गया राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में छात्रों ने कहा कि नया नियम शिक्षा-समानता, सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व की संरचना को प्रभावित करेगा। छात्रों ने कहा कि खून से लिखा पत्र दबाव बनाने का माध्यम नहीं बल्कि चेतावनी है कि यदि नियम वापस नहीं हुआ तो विरोध गोरखपुर से दिल्ली और अन्य विश्वविद्यालयों तक ले जाया जाएगा। छात्रों ने कहा कि वे अन्य छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों से संपर्क कर रहे हैं और जल्द संयुक्त मोर्चा बनाने पर विचार किया जाएगा।

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नियम है शिक्षा में अवरोध

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे श्रवण छात्र नेता नारायण दत्त पाठक ने कहा कि नया UGC नियम श्रवण समाज के छात्रों की उच्च शिक्षा में हिस्सेदारी को कम करेगा और उन्हें अध्ययन से दूर करेगा। पाठक ने आरोप लगाया कि नियम से शिक्षा के अवसर सीमित होंगे और छात्र उच्च शिक्षा तक पहुंच नहीं बना पाएंगे। उन्होंने कहा कि नियम वापस होने तक विरोध जारी रहेगा और छात्रों द्वारा अगले चरण की तैयारी भी की जा रही है।

औपनिवेशिक व्यवस्था का उदाहरण दिया विरोध में शामिल श्रवण छात्र श्रीओम पांडे ने नियम की तुलना औपनिवेशिक दौर के रॉलेट एक्ट से करते हुए कहा कि नियम में दंडात्मक प्रक्रिया और कारावास का प्रावधान छात्रों और परिवारों में डर पैदा करेगा। पांडे ने कहा कि ऐसा प्रावधान शिक्षा संस्थानों की प्रकृति के अनुकूल नहीं है और इससे छात्रों के सामाजिक प्रतिनिधित्व पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार और UGC ने नियम वापस नहीं लिया तो आंदोलन बड़े स्तर पर बढ़ाया जाएगा।

न्यायिक प्रक्रिया और अनुच्छेद 14 का उठाया मुद्दा श्रवण छात्र अनिकेत पांडे ने कहा कि यदि नियम के तहत किसी छात्र पर आरोप लगते हैं और जेल की सजा हो जाती है तथा बाद में वह अदालत में बेगुनाह सिद्ध होता है तो उसके अध्ययन, समय और प्रतिष्ठा का नुकसान कौन भरेगा। उन्होंने कहा कि नियम में फर्जी आरोप लगाने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान नहीं है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया का संतुलन बिगड़ता है।

अनिकेत ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 में वर्णित समानता और उचित प्रक्रिया के सिद्धांत के विरुद्ध है और शैक्षणिक संस्थानों में कानूनी भय का वातावरण बनाना अनुचित है।पुलिस ने संभाली स्थितिस्थिति को देखते हुए पुलिस बल ने विश्वविद्यालय गेट पर तैनाती बढ़ाई और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मार्गों पर निगरानी की।

पुलिस के अनुसार विरोध शांतिपूर्ण रहा और किसी झड़प, तोड़फोड़ या अव्यवस्था की सूचना नहीं मिली। पुलिस अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर व्यवस्था बनाए रखी और विश्वविद्यालय गतिविधियों को बाधित होने से रोकने की कोशिश की।

छात्रों ने सामाजिक और शैक्षणिक प्रभाव गिनाए छात्रों का कहना था कि नया नियम शिक्षा में समानता, प्रतिनिधित्व और अवसर को प्रभावित करेगा। उनका कहना था कि श्रवण समाज के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच पहले से चुनौतीपूर्ण है और दंडात्मक प्रावधानों वाला नियम परिस्थिति को और कठिन बना देगा। छात्रों ने कहा कि नियम एकतरफा है और उसमें प्रतिपक्षीय सुरक्षा का अभाव है, जिससे शिक्षा और समाज दोनों पर असर पड़ेगा।

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