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Saturday, 16th May, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। गोरखपुर में
पगेट रोग का पहला मामला सामने आया है। यहां के 64 वर्षीय एक
पुरुष में इस दुर्लभ हड्डी रोग की पुष्टि हुई है। आमतौर पर यह बीमारी दक्षिण भारत
में अधिक पाई जाती है, लेकिन मरीज कभी
दक्षिण भारत नहीं गए थे।
कमर दर्द की शिकायत के बाद
मरीज को परिजन एम्स गोरखपुर की ओपीडी में लाए थे। हड्डी रोग विभाग के विभागाध्यक्ष
प्रोफेसर (डॉ.) अजय भारती ने उनका परीक्षण किया। शुरुआती जांच में एक्स-रे और
एमआरआई में कमर की हड्डी की संरचना असामान्य दिखी, जिसमें कुछ
हिस्से सामान्य से अधिक ठोस थे। मेटाबॉलिक
हड्डी रोग की आशंका के बाद डॉ. भारती ने मरीज को एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. देबादित्य
दास के पास भेजा। डॉ. दास ने हड्डी की स्कैनिंग कराई, जिससे पैगेट रोग का निदान हुआ। एम्स गोरखपुर के
एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. देबादित्य दास मरीज का उपचार कर
रहे हैं।
पैगेट रोग एक दीर्घकालिक
अस्थि विकार है जो शरीर की प्राकृतिक हड्डी पुनर्चक्रण प्रणाली को बाधित करता है।
इसमें पुरानी हड्डी के ऊतकों की जगह नए ऊतक असामान्य रूप से तेजी से बनते हैं, जिससे हड्डियां समय के साथ भंगुर और विकृत हो सकती हैं।
यह रोग मुख्य रूप से श्रोणि, खोपड़ी, रीढ़ और पैरों
को प्रभावित करता है। उम्र बढ़ने के साथ पैगेट रोग का जोखिम बढ़ता है, और यदि परिवार में किसी को यह बीमारी रही हो तो इसके होने
की संभावना अधिक होती है। पैगेट रोग के लक्षणों में कूल्हे में दर्द, खोपड़ी में हड्डी की अत्यधिक वृद्धि के कारण सिरदर्द या
सुनने की क्षमता में कमी शामिल है। तंत्रिका जड़ पर दबाव पड़ने से पैर या हाथ में
सुन्नता, झुनझुनी और दर्द भी हो सकता है। कमजोर हड्डियां
मुड़ सकती हैं, जिससे पैरों में विकृति आ सकती है और आसपास के
जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
पगेट रोग एक दीर्घकालिक अस्थि विकार है। भारत में इसके रोगी तमिलनाडु में सबसे ज्यादा मिलते हैं। गोरखपुर में रोगी मिला है। 50 वर्ष या इससे ज्यादा आयु के पुरुषों में आनुवांशिक या पर्यावरणीय कारणों के कारण यह रोग होता है।