गोरखपुर विश्वविद्यालय और पुरवाई कला के बीच समझौता, गूंजेंगे 'माटी के सुर' और परंपरा के रंग
रूरलन्यूजनेटवर्क। दीनदयाल
उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और पुरवाई कला के बीच शनिवार को एक महत्वपूर्ण समझौता
ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन स्थित
कुलपति कार्यालय में संपन्न हुआ।
Image Source Here...
MoU
पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन और पुरवाई कला की अध्यक्ष ममता श्रीवास्तव ने हस्ताक्षर
किए। इस एमओयू के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध
लोक कलाओं और परंपराओं से परिचित कराया जाएगा।
इसके
अंतर्गत लोकगीत, लोकनाट्य, लोकनृत्य सहित विभिन्न लोक विधाओं की कार्यशालाएं आयोजित
की जाएंगी। ट्रेनिंग के बाद विद्यार्थियों द्वारा इन विधाओं की मंच पर प्रस्तुति करवाई
जाएगी , जिससे नई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
संस्कृति
से जुड़ने का अच्छा मौका- कुलपति
इस
अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल एकेडमिक ज्ञान का केंद्र
नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपराओं के संवर्धन का भी प्रमुख मंच है। इस एमओयू के माध्यम
से पुरवाई कला विद्यार्थियों को लोककलाओं से जुड़ने, समझने और मंच पर प्रस्तुत करने
का अवसर प्रदान करेगा, जिससे उनकी रचनात्मक क्षमता का भी विकास होगा।
''लोककलाएं
हमारी सांस्कृतिक पहचान की आत्मा''
पुरवाई
कला की अध्यक्ष ममता श्रीवास्तव ने कहा कि लोक कलाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान की आत्मा
हैं। विश्वविद्यालय के साथ यह समझौता नई पीढ़ी तक लोकगीत, लोकनाट्य और लोकनृत्य जैसी
विधाओं को जीवंत रूप में पहुंचाने की दिशा में एक सार्थक कदम है। उन्होंने विश्वास
जताया कि इस सहयोग से लोकपरंपराओं के संरक्षण और प्रसार को नई ऊर्जा मिलेगी।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय
के वित्त अधिकारी जयमंगल राव, ललित कला और संगीत विभाग की अध्यक्ष प्रो. उषा सिंह,
अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. रामवंत गुप्ता, प्रेमनाथ और हृदया त्रिपाठी भी
उपस्थित रहीं।