-
Monday, 15th June, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। दीनदयाल
उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में पिछले कई महीनों से लगातार हो रही पेड़ों की
कटाई को लेकर छात्रों और छात्र संगठनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
विश्वविद्यालय के अलग-अलग विभागों के बाहर और कैंपस के कई हिस्सों में बड़ी संख्या
में पेड़ काटे जाने का आरोप लगाया है।
छात्रों का दावा है कि 8 महीने में 3000 हजार से अधिक
पेड़ काटे जा चुके हैं। इसके लिए कुलपति ने एक करोड़ रुपए से अधिक में डील की है। छात्रों का कहना है कि अगर विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति
की ओर से पेड़ों की कटाई से जुड़े पूरे आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए, तो आंदोलन किया जाएगा।
8 महीने में 3000 से अधिक पेड़ काट डाले
छात्रों का आरोप है कि
विश्वविद्यालय में विकास कार्यों के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिससे कैंपस की हरियाली तेजी से खत्म हो रही है। कई छात्रों
ने यह भी दावा किया कि जिन पेड़ों को काटा गया, उनमें से कई
पूरी तरह हरे-भरे और सुरक्षित थे।
दैनिक भास्कर से बातचीत
करते हुए कला संकाय के छात्र आदित्य राज तिवारी ने कहा कि विश्वविद्यालय में पिछले
करीब आठ महीनों से पेड़ों की कटाई लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में
विभागों के पीछे मौजूद पेड़ों को काटा गया, लेकिन अब सामने
के पेड़ भी काटे जा रहे हैं, जिससे लोगों का
ध्यान इस ओर गया है।
आदित्य राज तिवारी ने कहा
“गोरखपुर विश्वविद्यालय में पिछले 8 महीना से
पेड़ों की कटाई जारी है पहले डिपार्टमेंट के पीछे मौजूद पेड़ों की कटाई हुई अब
सामने की कटाई होने पर लोगों को दिखाई दे रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने
डिस्ट्रिक्ट फारेस्ट में दिए आंकड़ों में 1195 पेड़ काटने की
अनुमति मांगी थी लेकिन इसके विपरीत अंधाधुन 3000 से अधिक पेड़
काट दिए गए कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। छात्र होने के नाते सभी का अधिकार
बनता है कि विद्यालय विश्वविद्यालय प्रशासन सभी डाटा को विद्यार्थियों के सामने
प्रस्तुत करें।”
छात्र बोले- कुलपति ने एक
करोड़ 28 लाख में डील की
कॉमर्स विभाग के छात्र आलेख
सूर्यवंशी ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुलपति का
कार्यकाल समाप्त होने के करीब है और अब अचानक विकास कार्य तेज किए जा रहे हैं।
आलेख सूर्यवंशी ने कहा
“गोरखपुर विश्वविद्यालय में कुलपति मैडम 3 साल से मौजूद
हैं लेकिन उनका कार्यकाल समाप्त होने को आया तब जाकर वह यहां विकास का काम कर रही
हैं। कुलपति ने पेड़ों की कटाई के लिए एक करोड़ 28 लाख का डील
किया है। इस बात का जवाब उनको देना होगा।”
विश्वविद्यालय के छात्र
नेता सतीश प्रजापति ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का जिक्र करते हुए विश्वविद्यालय
प्रशासन पर निशाना साधा। सतीश प्रजापति ने कहा- “जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी से आह्वान करते हैं कि
एक पेड़ मां के नाम लगाओ।
वहीं इसके उल्ट गोरखपुर
विश्वविद्यालय में हजारों पेड़ कुलपति के नाम कट गए। यह पूरा पेड़ डीएफओ के नाम हो
गया यह पूरा पेड़ मोदी जी योगी जी के नाम हो गया। हम सभी लोग इसको मिलकर एक बड़े आंदोलन में बदलेंगे।”
छात्र धीरेन्द्र सिंह ने
बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह कहा गया कि पुराने और दीमक लगे पेड़ों
को हटाया जा रहा है, लेकिन हकीकत
इससे अलग है। उनका दावा है कि कई स्वस्थ और छोटे पेड़ों को भी काट दिया गया।
छात्रों ने मां के नाम लगाए
थे पेड़
बीए के छात्र उज्जवल यादव
ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि कैंपस के बाहर “एक
पेड़ मां के नाम” का बोर्ड लगा है, लेकिन दूसरी
तरफ हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं।
उज्जवल यादव ने कहा- “यहां
बाहर कैंपस के कोडिंग लगा है जिसमें लिखा है एक पेड़ मां के नाम लेकिन इतने सारे
पेड़ कट गए इसका जवाब दे ही कौन होगा आखिर क्यों विश्वविद्यालय प्रशासन इसका जवाब
नहीं दे रहा है।”
फिलहाल इस पूरे मामले को
लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हालांकि छात्रों का कहना है कि अगर जल्द ही पेड़ों की कटाई से जुड़े पूरे रिकॉर्ड
और अनुमति संबंधी दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए, तो आंदोलन को
और तेज किया जाएगा।