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• gorakhpur, cm yogi, Housing Development • गोरखपुर / चरगांवा • 27-05-2026

आवास विकास की गलती ने बढ़ाई आवंटियों की चिंता, बिना अधिग्रहण मकान आवंटन, 27 साल बाद कोर्ट ने खाली करने को कहा

रूरल न्यूज नेटवर्क। शहर के पॉश इलाके बेतियाहाता में इस समय कई प्रभावशाली लोगों की चिंता बढ़ गई है। इन्होंने आवास विकास परिषद से जमीन आवंटित कराई थी। वहां मकान बनाकर वर्षों से रह रहे हैं। दरअसल आवास विकास परिषद ने इस जमीन का न तो अधिग्रहण किया और न ही काश्तकार को मुआवजा ही दिया। अब कोर्ट ने जमीन खाली करने को कहा है। जिससे इन आवंटियों में हड़कंप है। प्रभावित होने वालों में एक पूर्व विधायक, डॉक्टर, व्यवसायी शामिल हैं। कोर्ट अमीन मंगलवार की शाम को पैमाइश के लिए पहुंचे थे। जल्द ही कब्जा खाली भी कराया जाएगा।

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कोर्ट अमीन को देखकर वहां के आवंटियों ने हंगामा किया। उनका कहना है कि उन्होंने वैध रूप से एक सरकारी संस्था से जमीन खरीदी है। संस्था की गलती की सजा उन्हें नहीं मिलनी चाहिए। इस पूरे मामले के दौरान कटघरे में खड़े किए गए आवास विकास परिषद के अधिकारी गायब रहे। आवास विकास परिषद की ओर से खुर्रमपुर (बेतियाहाता) में आवासीय कालोनी के लिए जमीन अधिग्रहित की गई थी। इसमें श्याम सुंदर सराफ की भी 2 एकड़ जमीन थी। लेकिन आवास विकास परिषद ने उनकी 2 एकड़ 55 डिसमिल जमीन कब्जा कर ली।

उस समय की गई शिकायतों का भी संज्ञान नहीं लिया। 2 एकड़ का अधिग्रहण किया गया और इसी का मुआवजा भी दिया गया। 55 डिसमिल जमीन का मुआवजा भी नहीं दिया गया और जमीन भी अधिगृहीत नहीं की गई। अतिरक्त 55 डिसमिल जमीन पर भी आवास बनाकर लोगों को आवंटित कर दिया गया। जमीन के मालिक श्याम सुंदर सराफ ने 23 मार्च 1993 को स्थानीय अदालत में मुकदमा कर दिया। 28 जुलाई 1999 को सिविल जज सीनियर डिवीजन ने निर्णय दिया कि 3 महीने में अवैध कब्जा हटाकर जमीन का कब्जा उसके मालिक को दिया जाए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि विवादित जमीन किसी अन्य को हस्तांतरित नहीं की जाएगी। इस फैसले के विरुद्ध आवास विकास परिषद ने जिला जज के यहां अपील की लेकिन कोई राहत नहीं मिली।

इसके बाद मामला 21 नवंबर 2005 को हाईकोर्ट पहुंचा लेकिन वहां से भी परिषद को राहत नहीं मिली। कोई स्थगन भी नहीं आया। इसके बाद वादी श्याम सुंदर ने कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए इजरा वाद दाखिल किया।

9 मार्च 2026 को अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन की ओर से कोर्ट अमीन को आदेश दिया गया कि परिषद को संज्ञान में देते हुए कब्जा दिलाया जाए।

कब्जा दिलाने पहुंचे अमीन तो हुआ हंगामा

 कोर्ट के आदेश के क्रम में कोर्ट अमीन कब्जा दिलाने पहुंचे तो आवंटियों ने हंगामा कर दिया। कोर्ट के आदेश का हवाला देकर मकानों पर चिह्न लगाए गए हैं। हर मकान का कुछ हिस्सा इसमें जा रहा है।

जेसीबी भी साथ लेकर कोर्ट अमीन वीरेंद्र यादव गए थे लेकिन इसका उपयोग करने से पूरे मकान को दिक्कत हो सकती थी। ऐसे में कब्जा दिलाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इस मामले में आवंटी डा. राजीव जायसवाल ने कहा कि उन्होंने आवास विकास परिषद से मकान खरीदा था और वर्षों से उसमें रह रहे हैं। न परिषद की ओर से कोई सूचना दी गई और न ही कोर्ट की ओर से नोटिस मिला। उन्होंने कहा कि इस मामले में हमें न्याय मिलना चाहिए। दिलीप मुरारका ने कहा कि यदि जमीन विवादित है तो इसकी जिम्मेदारी आवास विकास परिषद की है।

पार्षद भी मौके पर पहुंचे

 स्थानीय पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी भी मौके पर पहुंच गए। आवंटियों के साथ उन्होंने कब्जा खाली कराने का विरोध किया। पार्षद ने कहा कि इसमें पूरी गलती आवास विकास परिषद की है और इस विभाग के जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं। यहां कोई जवाब देने नहीं आया। वादी को बिना मुआवजा दिए जमीन का आवंटन सही नहीं है।

लेकिन जो लोग इस समय यहां रह रहे हैं, उनकी भी कोई गलती नहीं है क्योंकि उन्होंने एक सरकारी विभाग से जमीन खरीदी है। लोग सरकारी विभागों पर नियमों के पालन को लेकर आंख मूंदकर विश्वास करते हैं। इस मामले का हल आवास विकास परिषद को निकालना चाहिए। वह वादी को उचित मुआवजा देकर इस समस्या का समाधान करें।

कोर्ट के आदेश के बाद भी कर दिया फ्री होल्ड

कोर्ट ने 1999 के अपने आदेश में साफ कहा था कि इस विवादित जमीन को किसी को हस्तांतरित न किया जाए लेकिन आवास विकास परिषद ने इसपर ध्यान नहीं दिया। 1983-84 में इन भवनों का आवंटन या गया था। 2002 में इन भवनों को फ्री होल्ड कर दिया गया। आवास विकास परिषद की ओर से निर्मित भवन संख्या 1 से 11 तक एवं भवन संख्या 52 शामिल है। पास में नगर निगम की पानी की टंकी के परिसर का कुछ हिस्सा भी इसी का है।

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