गोरखपुर मंडल में 14 SDM, तहसीलदार का वेतन रुका, पैमाइश, नामांतर के लंबित मामलों पर नाराज कमिश्नर ने दिया निर्देश
रूरल न्यूज नेटवर्क।गोरखपुर मंडल
में लंबित राजस्व वादों को लेकर कमिश्नर अनिल ढींगरा ने सख्त रुख अपनाया है।
सोमवार शाम आयुक्त सभागार में मुख्यमंत्री अनुश्रवण प्रणाली (CMIS) पोर्टल और सीएम
डैशबोर्ड पर विकास कार्यों व राजस्व मामलों की समीक्षा के दौरान उन्होंने 14 राजस्व
अधिकारियों का वेतन अग्रिम आदेश तक रोकने के निर्देश दिए।इनमें एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार
शामिल हैं। सभी अधिकारियों से लंबित मामलों में देरी को लेकर स्पष्टीकरण भी मांगा
गया है।
समीक्षा में पाया गया कि
राजस्व की धारा-24 (पैमाइश) और धारा-34 (नामांतरण) से जुड़े कई
मामले तीन से पांच वर्षों से अधिक समय से लंबित हैं। इससे जिले और मंडल की सीएम
डैशबोर्ड रैंकिंग प्रभावित हो रही है। जिन अधिकारियों के न्यायालयों में ऐसे पांच
या उससे अधिक मामले लंबित पाए गए, उनके वेतन रोकने की
कार्रवाई की गई।धारा-24 के मामलों की समीक्षा में गोरखपुर के एसडीएम कैंपियरगंज, गोला तथा देवरिया के एसडीएम सदर, भाटपाररानी, अपर उप
जिलाधिकारी प्रथम एवं द्वितीय देवरिया और एएसडीएम देवरिया के न्यायालयों में सबसे
अधिक मामले लंबित मिले। इस पर कमिश्नर ने संबंधित अधिकारियों का वेतन अग्रिम आदेश
तक रोकने के निर्देश दिए।
इसी प्रकार नामांतरण के
मामलों की समीक्षा में तहसीलदार सदर गोरखपुर, तहसीलदार
न्यायिक सदर गोरखपुर, तहसीलदार
न्यायिक सदर देवरिया के साथ ही गोरखपुर के नायब तहसीलदार कैंपियरगंज, पिपराइच और देवरिया के नायब तहसीलदार रामपुर कारखाना एवं
भटनी स्तर पर तीन और पांच साल से अधिक पुराने मामले लंबित पाए गए।इस पर कमिश्नर ने इन अधिकारियों का भी वेतन रोकने के
निर्देश जारी किए।
बैठक में CMIS पोर्टल पर यूपीआरएनएसएस की पांच और यूपी प्रोजेक्ट
कार्पोरेशन की छह परियोजनाएं रेड श्रेणी में मिलने पर संबंधित अधिकारियों से जवाब
मांगा गया। स्पष्ट कारण न बता पाने पर कमिश्नर ने दोनों कार्यदायी संस्थाओं के
अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।आईसीडीएस पोषण अभियान के तहत पिछले तीन महीनों में कुपोषित
बच्चों की स्थिति में अपेक्षित सुधार न मिलने पर गोरखपुर और देवरिया के जिला
कार्यक्रम अधिकारियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
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कमिश्नर ने 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली विकास परियोजनाओं की भी
समीक्षा की और धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-3 की चारफाटक-असुरन मार्ग, मानीराम-बालापार
मार्ग और गोरखपुर-पिपराइच मार्ग परियोजनाओं की धीमी रफ्तार पर उन्होंने अधिकारियों
को फटकार लगाई।
एचएन सिंह चौराहा से हड़हवा
फाटक होते हुए गोरखनाथ मंदिर तक सड़क निर्माण में जल निगम और लोक निर्माण विभाग की
धीमी कार्यप्रणाली पर अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता को चेतावनी दी गई। विरासत
गलियारा परियोजना से जुड़े अभियंताओं को भी निर्माण कार्य में तेजी लाने के
निर्देश दिए गए।
महायोगी गुरु गोरखनाथ
आयुष विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम निर्माण में देरी पर लोक निर्माण विभाग (भवन) के
अधिशासी अभियंता को चेताया गया। वहीं अमृत 2.0 योजना के तहत गोड़धोइया
नाला और रामगढ़ताल के जीर्णोद्धार, इंटरसेप्शन, डायवर्जन एवं ट्रीटमेंट कार्यों में विलंब पर जल निगम
के मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता को भी चेतावनी दी
गई।बैठक में गोरखपुर के जिलाधिकारी दीपक मीणा समेत मंडल
के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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