-
Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। बीआरडी मेडिकल
कॉलेज में इंटर्न डॉक्टर
व मेल नर्सों के बीच हुए विवाद के बाद नर्सिंग कर्मचारियों का धरना जारी है।
प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने इंटर्न डॉक्टर व मेल नर्सों को चिकित्सकीय
कार्य से प्रतिबंधित कर दिया है।
यह प्रतिबंध जांच के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय
समिति की रिपोर्ट तक जारी रहेगा। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। हालांकि
प्राचार्य की ओर से की गई इस कार्रवाई से नर्सिंग स्टाफ और भड़क गए हैं। लखनऊ से
प्रदेश स्तरीय कुछ और पदाधिकारियों के शनिवार को वहां पहुंचने की संभावना है।
शनिवार को भी सुबह 9 बजे से ही धरना-प्रदर्शन
जारी रहेगा। नर्सिंग स्टाफ आरोपी डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है। उनके
विरुद्ध गुलरिहा थाने में तहरीर भी दी गई है लेकिन मेडिकल काॅलेज प्रशासन इस मामले
में एफआईआर की सहमति नहीं दे रहा है। इसी विवाद के कारण दो दिन पहले की प्राचार्य
को गोरखपुर वापस आना पड़ा। उन्होंने पूरे दिन कई बार दोनों पक्षों से वार्ता की
लेकिन सर्वमान्य हल नहीं निकल सका।
गुरुवार को दिन में इंटर्न डॉक्टरों ने आन
ड्यूटी कर्मचारियों के साथ मारपीट की थी। कर्मचारियों का कहना है कि दोपहर करीब 2
बजे सर्जरी
विभाग का एक इंटर्न डॉक्टर ट्रॉमा वार्ड में इंजेक्शन लेने पहुंचा। वह एक साथ पूरा
पैकेट ले जाने लगा।
ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने उसे रोका और कहा कि
जितनी जरूरत हो उतनी ही दवा ले जाए, क्योंकि सभी दवाओं का रिकॉर्ड वार्ड में दर्ज
किया जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि बिना एंट्री के दवा ले जाने से हिसाब
गड़बड़ा जाता है और बाद में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है। इसी बात को
लेकर बहस शुरू हुई। बहस हाथापायी में बदल गई।
नर्सिंग स्टाफ का आरोप है कि इसके बाद इंटर्न
डॉक्टर वहां से चला गया और डेढ़ दर्जन से अधिक साथियों के साथ दोबारा वहां पहुंचा।
नर्सिंग स्टाफ संतोष मसीह, शिवम मिश्रा और जय प्रकाश को पीटा गया। यह घटना सीसीटीवी
कैमरे में भी कैद हुई है। घटना के विरोध में देर रात तक नर्सिंग कर्मचारी धरने पर
रहे। उनके सामने इंटर्न डॉक्टरों के साथ एमबीबीएस छात्र भी खड़े हो गए थे।
मरीजों के लिए भी दिक्कत
डॉक्टर व नर्सिंग कर्मचारियों के बीच विवाद बढ़ने
से वहां भर्ती मरीजों पर भी असर पड़ रहा है। कर्मचारी भले ही यह कह रहे हैं कि उनकी
ओर से बारी-बारी से ड्यूटी की जा रही है लेकिन डॉक्टरों के साथ तनातनी होने के
कारण काम प्रभावित है। इस पूरे घटनाक्रम से मरीजों के परिजन भी घबराए हैं।
हालांकि प्राचार्य ने दावा किया है कि उन्होंने
मामले को सुलझा लिया है। सभी कर्मचारियों से धरना-प्रदर्शन न करने की अपील की है।
उन्होंने यह भी कहा कि आफिस से निकलने के बाद वह वार्डों में राउंड पर भी गए थे।
सारी व्यवस्था ठीक है।
कमेटी की रिपोर्ट पर निर्भर होगी कार्रवाई
इस मामले मे गठित कमेटी में दो विभागाध्यक्ष एवं
एक नर्सिंग स्टाफ को शामिल किया गया है। इस कमेटी को तीन कार्यदिवस में अपनी
रिपोर्ट देनी होगी। हालांकि कर्मचारियों के इससे भी न्याय की उम्मीद नहीं है। वे सीधी
कार्रवाई पर अड़े हैं। उनका कहना है कि यदि सीधे तौर पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे
एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस के आला अधिकारियों से मिलेंगे। इसपर भी बात नहीं
बनी तो कोर्ट का सहारा लेंगे।
कर्मचारी पर प्रतिबंध लगाने से भड़के
इंटर्न डॉक्टर के साथ ही पीड़ित कर्मचारी पर भी प्रतिबंध लगाने से कर्मचारी और भड़क गए हैं। इसीलिए उन्होंने आंदोलन और तेज करने को कहा है। मेडिकल काॅलेज प्रशासन का यही रवैया रहा तो कर्मचारी कार्यबहिष्कार पर भी जा सकते हैं।