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सन्देश
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गोरखपुर / चरगांवा
• 06-03-2026
गोरखपुर विश्वविद्यालय में शुरू होगी मास्टर ऑफ फार्मेसी की पढ़ाई, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने दो कोर्स को दी मंजूरी
रूरल न्यूज नेटवर्क।दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में सत्र 2026-27 से M.Pharma (मास्टर ऑफ फार्मेसी) की पढ़ाई शुरू होने जा रही है। फार्मेसी काउंसिल ऑफ
इंडिया ने विश्वविद्यालय के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए M.Pharma के दो कोर्स के संचालन की स्वीकृति दे दी है।
इससे पूर्वांचल के छात्रों को फार्मेसी में उच्च शिक्षा और शोध के लिए नए अवसर
मिलेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार M.Pharma के फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री और
फार्मास्यूटिक्स पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए पीसीआई के समक्ष प्रस्ताव भेजा गया
था। परिषद ने दोनों कोर्स को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही नियमानुसार शिक्षण, गैर शिक्षण और तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति करने
तथा एईबीएएस पोर्टल पर आवश्यक विवरण अद्यतन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
नए सत्र से 15-15 सीटों पर होगा एडमिशन
नए शैक्षणिक सत्र से दोनों कोर्स में 15-15 सीटों पर एडमिशन लिया जाएगा। विश्वविद्यालय
परिसर में M.Pharma की पढ़ाई शुरू होने से छात्रों को दवा निर्माण, औषधीय अनुसंधान, गुणवत्ता नियंत्रण
और फार्मास्यूटिकल उद्योग से जुड़ी पढ़ाई का बेहतर अवसर मिलेगा।
विश्वविद्यालय में दो साल पहले D.Pharma और B.Pharma पाठ्यक्रम में 60-60 सीटों पर एडमिशन की मंजूरी मिली थी। बाद में B.Pharma की सीटें बढ़ाकर 100 करने की अनुमति भी दी गई। सत्र 2025-26 से फार्मेसी में Phd की पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है। अब M.Pharma की मंजूरी मिलने के बाद विश्वविद्यालय परिसर
में फार्मेसी से जुड़े सभी प्रमुख पाठ्यक्रम उपलब्ध हो जाएंगे।
पूर्वांचल के
छात्रों को अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा
अब तक पूर्वांचल के छात्रों को M.Pharma या फार्मेसी में Phd करने के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता
था। M.Pharma
की पढ़ाई शुरू होने के बाद छात्रों को उच्च
शिक्षा और शोध के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें गोरखपुर में ही यह सुविधा
मिल सकेगी।
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कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि M.Pharma
की स्वीकृति मिलने से विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षण
से लेकर उच्च स्तरीय शोध तक की पूरी शैक्षणिक व्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने कहा
कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की बेहतर अधोसंरचना, आधुनिक प्रयोगशालाओं, गुणवत्तापूर्ण
संकाय और शोध आधारित वातावरण का परिणाम है।