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• gorakhpur, cm yogi, Nepal border • गोरखपुर / चरगांवा • 05-06-2026

भारत-नेपाल बॉर्डर पर बने स्थाई स्वास्थ्य जांच चौकियां, डॉक्टर ने उठाई आवाज, संक्रामक बीमारियों को देखते हुए जरूरी

रूरल न्यूज नेटवर्क  गोरखपुर के बाल रोग विशेषज्ञ डा. आरएन सिंह ने भारत-नेपाल सीमा के सभी लैंड पोर्ट्स पर स्थायी स्वास्थ्य जांच चाकियां स्थापित करने की मांग की है। मिशन सेव इंडिया के संस्थापक डा. सिंह ने कहा कि संक्रामक रोगों को देखते हुए सीमा के सभी प्रवेश द्वारों (लैंड पोर्ट्स) पर स्थायी स्वास्थ्य जांच चौकियां स्थापित करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर तेजी से फैलने वाली संक्रामक एवं घातक वायरल बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए देश की सीमाओं पर स्वास्थ्य सुरक्षा को और मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है। डॉ. सिंह ने कहा कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर यात्रियों की स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था तो है, लेकिन केवल एयरपोर्ट आधारित निगरानी व्यवस्था को पर्याप्त नहीं माना जा सकता। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण प्रतिदिन हजारों लोग विभिन्न लैंड पोर्ट्स और सीमा चौकियों के माध्यम से आवागमन करते हैं। ऐसे में यदि किसी संक्रामक रोग का संक्रमण सीमा पार से फैलता है तो उसका समय रहते पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी संक्रामक रोग के प्रसार को रोकने के लिए प्रारंभिक स्तर पर निगरानी और जांच व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि भारत-नेपाल सीमा के सभी प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर स्थायी स्वास्थ्य जांच केंद्र स्थापित किए जाएं, तो संभावित संक्रमणों की पहचान प्रारंभिक चरण में ही की जा सकेगी तथा उनके प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

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डॉ. सिंह के अनुसार सीमा क्षेत्रों में स्वास्थ्य जांच चौकियों के साथ-साथ प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों, आधुनिक जांच उपकरणों, आइसोलेशन सुविधाओं तथा आपातकालीन चिकित्सा संसाधनों की भी व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर एक समन्वित स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र विकसित करें, जिससे किसी भी महामारी या संक्रामक रोग की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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उन्होंने कहा कि भारत की विशाल जनसंख्या और पड़ोसी देशों के साथ व्यापक संपर्क को देखते हुए स्वास्थ्य सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग माना जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमा क्षेत्रों में स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाना केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित का विषय है।

डॉ. आर. एन. सिंह ने केंद्र सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा संबंधित एजेंसियों से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने और शीघ्र आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समय रहते प्रभावी स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय अपनाकर देश को भविष्य में संभावित वैश्विक महामारी और अन्य संक्रामक रोगों के खतरों से सुरक्षित रखा जा सकता है।

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