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Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज़ नेटवर्क। गोरखपुर में UGC के नए नियमों के विरोध में NSUI के छात्र नेताओं ने DM कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। NSUI ने नए प्रावधानों को शिक्षा व्यवस्था में असमानता बढ़ाने वाला बताते हुए तत्काल समीक्षा की मांग उठाई। छात्रों का आरोप है कि UGC ने नियम लागू करने से पहले छात्र संगठनों, शिक्षाविदों और विश्वविद्यालयों से विस्तृत विमर्श नहीं किया।
NSUI के नेताओं का
कहना है कि उच्च शिक्षा
राष्ट्रीय स्तर पर
संक्रमण के दौर से गुजर
रही है और ऐसे समय
में UGC द्वारा बिना
पर्याप्त परामर्श के नियम लागू करना
छात्र हित के खिलाफ है।
NSUI ने सवाल उठाया
कि क्या नए प्रावधान शिक्षा में
समान अवसर, पारदर्शिता
और सामाजिक न्याय
के सिद्धांतों के
अनुरूप हैं या नहीं।
भेदभाव और विभाजन की
आशंका
NSUI से जुड़े छात्र
नेता आदित्य शुक्ला
ने कहा कि नियमों की
आड़ में छात्रों
को जाति और वर्ग के
आधार पर बांटकर
कार्रवाई करना गंभीर
चिंता का विषय है। उनका
कहना है कि विश्वविद्यालयों में पहले
से ही छात्र
उत्पीड़न, शिकायत निवारण,
आंतरिक मूल्यांकन और
पारदर्शिता से जुड़े
मुद्दे मौजूद हैं,
ऐसे में विभाजनकारी
प्रावधान शिक्षा व्यवस्था
को और जटिल बना देंगे।
NSUI ने यह भी कहा कि
उच्च शिक्षा का
उद्देश्य समाज के
हर वर्ग तक समान अवसर
पहुंचाना है, न
कि किसी समूह
को अलग करना।
शोषण पर कार्रवाई की
मांग
प्रदर्शन के दौरान
NSUI ने कहा कि देशभर के
महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों
में छात्रों के
उत्पीड़न, दंडात्मक कार्रवाई और
अकादमिक भेदभाव से
जुड़ी शिकायतें सामने
आती रही हैं।
लेकिन शिकायत निवारण
तंत्र कमजोर होने
के कारण छात्रों
को न्याय नहीं
मिल पाता। NSUI ने
मांग की कि सरकार छात्र
शिकायत निवारण व्यवस्था
को मजबूत करे
और कार्रवाई की
प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए।
ज्ञापन के माध्यम
से प्रधानमंत्री से
अनुरोध किया गया
कि UGC के नए नियमों की
समीक्षा कर आवश्यक
संशोधन किए जाएं
ताकि छात्र हित
सुरक्षित रह सके।
NSUI ने यह भी कहा कि
उच्च शिक्षा संस्थानों
में किसी भी प्रकार के
दमनात्मक कदम या
भेदभावपूर्ण कार्रवाई की अनुमति
नहीं दी जानी चाहिए।
राजनीतिक संदर्भ भी जुड़ाछात्र नेताओं का कहना है कि केंद्रीय नीतियों का प्रभाव राज्यों की शिक्षा व्यवस्था और छात्र समुदाय पर सीधा पड़ता है। इसलिए शिक्षा संबंधी बड़े निर्णयों में छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। NSUI ने केंद्र से अपील की कि नीति निर्माण प्रक्रिया को अधिक प्रतिनिधिक और संवाद आधारित बनाया जाए।
ज्ञापन
सौंपने के दौरान
NSUI से जुड़े विजय
नारायण मिश्रा, प्रभात
धर दूबे, देवेंद्र
पाण्डेय और अरमान
खान सहित बड़ी
संख्या में छात्र
उपस्थित रहे। विरोध
के बाद NSUI की
बैठक हुई जिसमें
आगामी कार्यक्रम और
चरणबद्ध आंदोलन की
रणनीति पर चर्चा
की गई। NSUI ने
चेतावनी दी कि यदि नियमों
की समीक्षा नहीं
की गई तो विरोध और
तेज होगा और इसे राज्य
तथा राष्ट्रीय स्तर
पर उठाया जाएगा।