रमजान: इबादत-इस्लामी अकीदों पर कार्यक्रम, संयम और आखिरत की याद पर दिया संदेश
रूरलन्यूजनेटवर्क।माह-ए-रमजान
के दौरान इबादत के सही तरीकों, संयम अपनाने और आखिरत की याद को मजबूत करने के उद्देश्य
से तुर्कमानपुर सहित विभिन्न इलाकों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों
में रमजान की अहमियत, तकवा और इस्लामी अकीदों पर विस्तार से चर्चा की गई।
वहीं, तुर्कमानपुर स्थित
मकतब इस्लामियात में मुस्लिम महिलाओं की 29वीं संगोष्ठी आयोजित हुई। कार्यक्रम की शुरुआत
खुशी नूर की कुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुई। सना फातिमा, नूर अक्सा, फातिमा और शिफा
ने हम्द व नात-ए-पाक पेश की। संगोष्ठी की अध्यक्षता ज्या वारसी ने की।
रमजान इंसान को परहेजगार बनने का देता है मौका
मुख्य वक्ता मुफ्तिया
शहाना खातून ने कहा कि इस्लामी महीनों में रमजान को विशेष दर्जा हासिल है। इस महीने
में अल्लाह अपने बंदों पर खास रहमत और बरकत अता करता है। रमजान का मकसद इंसान को बुरे
कामों से दूर रखकर हलाल और हराम की पहचान सिखाना है। उन्होंने कहा कि रमजान में की
गई नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
विशिष्ट वक्ता कारी मुहम्मद
अनस नक्शबंदी ने कहा कि रमजान अल्लाह की रहमत का महीना है, जो इंसान को आत्मसंयम का
अभ्यास कराता है। रोजा यह एहसास कराता है कि जब इंसान जायज चीजों से खुद को रोक सकता
है, तो गलत कामों से भी खुद को रोक सकता है।
Image Source Here...
संचालन कर रहीं शिफा
खातून और सादिया नूर ने कहा कि रमजान के महीने में ही कुरआन-ए-पाक नाजिल हुआ है। इस
कारण तरावीह के जरिए कुरआन सुनना और उस पर अमल करना अहम है। रमजान इंसान की जिंदगी
को पूरे साल सही दिशा में ले जाने की प्रेरणा देता है।
Image Source Here...
इसी क्रम में जाफरा बाजार
स्थित सब्जपोश हाउस मस्जिद, जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद और मदरसा रजा-ए-मुस्तफा
तुर्कमानपुर में आयोजित पांच सप्ताह की इस्लामी अकीदे की विशेष कार्यशाला के अंतिम
सप्ताह में कब्रों की जियारत के विषय पर जानकारी दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुफ्ती-ए-शहर
अख्तर हुसैन ने की।