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gorakhpur, cm yogi, cold day, Ramnayan, Shahi, farming 16-Jan-2026 08:59 AM

रामनयन शाही ने खेती किसानी के दम पर चारों बेटों को शीर्षस्थ पदों पर कराया आसीन

रूरल न्यूज नेटवर्क। आपने हर माता- पिता के मुंह से अक्सर सुना होगा कि हम अपने बेटे को डाक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, बिजनेसमैन बनाएंगे। कुछ ऐसा ही सपना गगहा के सिहाइजपार गांव के किसान रामनयन शाही ने भी देखा। इनके चार पुत्र थे। चारों को अलग-अलग क्षेत्र में तैयार करने के लिए रामनयन शाही ने बचपन से ही खास रणनीति तैयार कर ली थी। सबसे बड़े सुपुत्र उमाशंकर शाही आज यूपी पुलिस से सेवानिवृत हो चुके हैं। दूसरे नंबर के पुत्र गौरीशंकर शाही इंजीनियर हैं जबकि तीसरे नंबर के सुपुत्र डा. शिवशंकर शाही आज चिकित्सा जगत में नई दिल्ली तक अपनी अमिट पहचान स्थापित कर चुके हैं।

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इसके अलावा एलएलबी एलएलएम करने के बाद प्रेमशंकर शाही लखनऊ में पुलिस इंस्पेक्टर के रूप में अपनी सेवा प्रदान कर रहे हैं। डा. शिवशंकर शाही ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गगहा के सरकारी स्कूल से अर्जित की। इसके बाद किसान इंटर कालेज गगहा से हाईस्कूल इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्ष 1998 में बीआरडी मेडिकल कालेज से एमबीबीएस की उपाधि हासिल कर डा. शिवशंकर शाही ने दिल्ली का रूख किया। युनिवर्सिटी कालेज आफ मेडिकल सांइस नई दिल्ली से वर्ष 2005 में एम एस सर्जरी का कोर्स पूरा किया। अपने मधुर व्यवहार मरीजों से बने मिलनसार रिश्ते ने इन्हें दिल्ली में इस कदर व्यवस्थित कर दिया कि अब डा. शाही ने कभी सपने में सोचा था कि गोरखपुर की भी राह उनका इंतजार कर रही होगी।

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अपने मधुर व्यवहार लचीला स्वभाव के कारण इनके जूनियर इसके काफी करीब रहे। इस कारण दिल्ली के मेडिकल कालेज से लेकर सभी उच्च स्तरीय हास्पिटलों में इनकी मजबूत पकड़ बन गई थी। घर वालों के अलावा गोरखपुर के इनके मित्र जब भी दिल्ली जाते थे तो इन्हें गोरखपुर में रहने की जिद करने लगते थे। डा. विनय राय, डा. सुमन भाटिया आदि मित्रों की जिद पर एक बार ऐसे ही गोरखपुर आए और अचानक यहां रहने का मन बन गया। उस समय तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ के कारण अपराधियों के भी मंसूबे पस्त होने के कारण चिकित्सक सुकून महसूस कर रहे थे।

वर्ष 2012 में दाउदपुर में अनबुझे मन से ग्लोबल हास्पिटल खोला। कुछ ही महीने में यहां मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि और मरीजों के तीमारदारों की संतुष्टि ने डा. शाही को पूर्वांचलवासियों की सेवा के लिए गोरखपुर ही रोक लिया। इससे डा. शाही के हौसले इस कदर बढ़ गए कि जून 2017 में बुद्ध विहार के पास मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल आज भी मरीजों की सेवा में तत्पर है।

यह रहे सामाजिक कार्य

गोल्ड मेडलिस्ट डा. शिवशंकर शाही ने चिकित्सा क्षेत्र के दम पर सामाजिक कार्यों की लंबी फेहरिस्त भी खड़ी कर दी। वर्ष 2017 में ही एक लड़की के दिल में सुराग होने की खबर एक दैनिक अखबार के माध्यम से इन तक पहुंची। मानवता के नाते इन्होंने जब उसके घर जाकर देखा तो लोगों ने उस लड़की को आर्थिक अभाव के कारण इलाज करा पाने से घर से बाहर निकाल दिया था। चूंकि इलाज में लंबा खर्चा लगना था तो डा. शाही पहले तो थोड़ा हिचकिचाए किंतु फिर पूरी तरह इलाज का मन बना लिया। कुछ मित्रों से सहयोग लिया और कुछ योगी आदित्यनाथ ने इस पुनीत कार्य के लिए सहयोग कर दिया। दिल्ली एम्स में बच्ची का सफल इलाज हुआ और आज बच्ची खुशहाल जीवन यापन कर रही है। डा. शाही बताते हैं कि इस घटना ने मुझे इस कदर प्रभावित कर दिया कि मैंने कैंप लगाना शुरू किया। पहले कैंप में 280 ऐसे बच्चे सामने आए जो दिल की बीमारियों से ग्रसित थे। वर्ष 2017 में एक और ऐसा ही केस डा. शाही के समक्ष आया। डा. शाही ने रूरल न्यूज नेटवर्क संवाददाता को बताया कि वर्ष 2017 में ही रात में एक मूवी देखने गया था।

इंटरवल के दौरान मेरे पास अचानक फोन आया कि एक लड़की के शरीर में लोहे का सरिया आर-पार हो गया है। तत्काल मैं मौके पर पहुंचा तो मरीज की हालत नाजुक थी। रिस्क लिया तो बेहोशी चिकित्सक को बुलाकर करीब 6 घंटे की सर्जरी के बाद इलाज सफल रहा और उसकी जान बच गई। डा. शाही बताते हैं कि यदि किसी भी कार्य को पूरे मनोयोग से किया जाए तो मेहनत रंग लाती है।

यह रही उपलब्धियां

डा. शिवशंकर शाही वर्तमान में एमबीबीएस, एमएस, डीएनबी, एफआईएजीइएस, एफएएलएस डायरेक्टर चीफ लेप्रोस्कोपी, लेजर, रेडियो फ्रिक्वेंसी एबलेशन एनोरेटल सर्जन के रूप में मरीजों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा यूपी एसोसिशन आफ सर्जन आफ इंडिया के सेक्रेटरी भी हैं। पूर्व प्रेसीडेंट आईएमए गोरखपुर, पूर्व प्रेसीडेंट यूपी नर्सिंग होम एसोसिशन गोरखपुर, पूर्व वाइस चेयरमैन हास्पिटल बोर्ड आफ इंडिया उत्तर प्रदेश के दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर चुके हैं। डा. शिवशंकर शाही ईसी मेंबर यूपी एसोसिशन आफ सर्जन आफ इंडिया यूपी के पद पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन भी कर रहे हैं।

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