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Wednesday, 1st April, 2026
चरगांवा
महायोगी गुरु गोरखनाथ
आयुष विश्वविद्यालय में
संधिवात सहित हड्डी
एवं जोड़ों से
संबंधित रोगों पर
व्यापक शोध शीघ्र
ही शुरू होगा।
इस शोध में एक निजी
कंपनी विश्वविद्यालय के
साथ सहयोग करेगी।
शोध के तहत
रोगियों की बोन मिनरल डेंसिटी
(बीएमडी) की जांच
कर उपचार किया
जाएगा। हड्डियों में
पाए जाने वाले
विभिन्न रोगों का
वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा।
इस शोध में
यह भी आकलन किया जाएगा
कि आयुर्वेदिक उपचार
से रोगियों को
किस स्तर तक लाभ मिल
रहा है और आयुष की
प्राचीन चिकित्सा पद्धतियां
कितनी प्रभावी सिद्ध
हो रही हैं।
विश्वविद्यालय और निजी
कंपनी की संयुक्त
टीम गांव-गांव
जाकर चिकित्सा शिविर
लगाएगी।
इन शिविरों में हड्डी रोगों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी, जिसके आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार होगी।
जोड़ों के दर्द से पीड़ित रोगियों को निजी कंपनी की ओर से नि:शुल्क औषधियां उपलब्ध कराई जाएंगी। आयुष विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग में निर्मित औषधियों को भी इस शोध में शामिल किया जाएगा। उपचार के बाद रोगियों पर औषधियों के प्रभाव से जुड़े सभी परिणामों को व्यवस्थित रूप से संग्रहीत किया जाएगा।
आयुष विश्वविद्यालय शीघ्र ही एक विशेष शिविर आयोजित करने की तैयारी में है। इस शिविर में रोगियों की जांच एवं उपचार की पूरी जिम्मेदारी निजी कंपनी उठाएगी, जिसका मार्गदर्शन आयुष विश्वविद्यालय के चिकित्सक करेंगे।