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gorakhpur, cm yogi, scholarship 09-Apr-2026 03:45 PM

छात्रों ने स्कॉलरशिप घोटाला का लगाया आरोप, 50 से अधिक फॉर्म अचानक रिजेक्ट

रूरल न्यूज नेटवर्क गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्कॉलरशिप से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। बृहस्पतिवार को अलग-अलग विभागों के छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर डीएम कार्यालय पहुंच गए और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। छात्रों का आरोप है कि 100 से ज्यादा छात्रों की स्कॉलरशिप बिना स्पष्ट कारण के रिजेक्ट कर दी गई है। जिससे उनकी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।

छात्रों ने लगाया लापरवाही का आरोप

निखिल राय ने विश्वविद्यालय प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और डीएसडब्ल्यू पर आरोप लगाते हुए कहा कि, 7 मार्च को मेरे स्कॉलरशिप फॉर्म का स्टेट्स रिजेक्ट शो होने लगा। जबकि इसमें सुधार का डेट फरवरी में ही समाप्त हो गया था। विभाग के द्वारा इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो सकती यह सवालिया निशान है। ओम मणि त्रिपाठी ने कहा कि सिर्फ जनरल वालों के साथ ऐसा हुआ है। हमसबके फ्रॉम के स्टेट्स में खुद का आय प्रमाण पत्र लगाने से रिजेक्शन होने की बात कही गई है।

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मैंने खुद स्टेट्स चेक करके इसको सुधार किया था और अपनी जगह अपने पिता का प्रमाण पत्र लगाया था। इसके बाद भी इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो सकती, कल्पना से परे है।

गौरव तिवारी ने बताया कि गार्जियन की आय संशोधित करने के लिए जो समय दिया गया था, उसी के भीतर सभी ने अपने माता-पिता की आय अपडेट कर 15 दिसंबर तक जरूरी दस्तावेज विश्वविद्यालय में जमा कर दिए थे। इसके बाद उनके फॉर्म का स्टेटस “एक्सेप्ट” दिखा रहा था और सभी बॉक्स हरे हो गए थे। लेकिन इसके बाद समाज कल्याण विभाग ने 25 फरवरी 2026 को अचानक हमसबके आवेदन को निरस्त कर दिया। इसकी जानकारी छात्रों को 7 अप्रैल को स्टेटस चेक करने पर मिली।

छात्रों का कहना है कि इस दौरान एक ‘सस्पेक्टेड लिस्ट’ भी जारी हुई थी, जिसमें उनका नाम नहीं था, फिर भी उनके आवेदन खारिज कर दिए गए।

वंशिका सिंह ने कहा हम सभी विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से संबंधित हैं तथा हमारी पढ़ाई इस छात्रवृत्ति पर निर्भर है। बिना कारण आवेदन निरस्त होने से हमारी पढ़ाई प्रभावित हो रही है तथा हमें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

गुस्साए छात्रों ने एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीत कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या बताई। इस पर एडीएम ने आश्वासन दिया कि मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन और समाज कल्याण विभाग से बातचीत कर समाधान निकाला जाएगा।

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