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Saturday, 16th May, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। एम्स के डॉक्टरों ने 20 वर्षीय युवक की कोहनी की जकड़न की सफल सर्जरी
की है। यह एम्स गोरखपुर में आर्थ्रोस्कोपी तकनीक से की गई इस तरह की पहली सर्जरी
है। छोटे कैमरे की मदद से न्यूनतम चीरा तकनीक का उपयोग कर युवक को लंबे समय से चली
आ रही परेशानी से राहत मिली है।
युवक को काफी समय से कोहनी मोड़ने और सीधा करने में दिक्कत
हो रही थी। इसके कारण उसे खाना खाने, कपड़े पहनने और वजन
उठाने जैसे दैनिक कार्यों में भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। जांच के दौरान
उसकी कोहनी के जोड़ में जकड़न और अंदरूनी चिपकाव पाया गया था। हड्डी एवं जोड़ रोग
विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) अजय भारती ने बताया कि ओपीडी में प्रारंभिक जांच के
बावजूद जकड़न का सटीक कारण पता नहीं चल पा रहा था। बाद में कोहनी की आर्थ्रोस्कोपी
द्वारा समस्या का मूल कारण ज्ञात हुआ। इस प्रक्रिया में छोटे-छोटे छेदों के माध्यम
से कैमरा और विशेष उपकरण डालकर जोड़ के अंदर की सफाई की गई और जमे हुए ऊतकों को
हटाया गया। यह एक न्यूनतम चीरा तकनीक है, जिसमें बड़े चीरे
की आवश्यकता नहीं होती। सर्जरी के बाद मरीज की कोहनी की गति में स्पष्ट सुधार देखा
गया है और उसका दर्द भी गायब हो गया है। डॉ. भारती ने बताया कि आर्थ्रोस्कोपी
कोहनी की जकड़न, लूज बॉडी रिमूवल, ऑस्टियोआर्थराइटिस, आर्थ्रोसिस/कॉन्ट्रैक्चर रिलीज, साइनोवेक्टोमी और लेटरल एपिकॉन्डिलाइटिस जैसी
समस्याओं में प्रभावी है।
एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि एम्स आधुनिक उपकरणों और अनुभवी सर्जनों की टीम से लैस है। यहां कोहनी की आर्थ्रोस्कोपी सहित विभिन्न जटिल आर्थोपेडिक प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जाता है। उनका लक्ष्य मरीजों को सर्वोत्तम संभव देखभाल प्रदान करना और उन्हें दर्द मुक्त तथा सक्रिय जीवन जीने में मदद करना है।