विश्वनाथ सिंह, रूरल
न्यूज नेटवर्क। आज
महानगर में सुधा
मोदी मात्र एक
नाम नहीं बल्कि
एक अभियान के
रूप में उभरकर
सामने आ रहा है। पारिवारिक
जिम्मेदारियों के बीच
सोशल वर्क में
भी अपनी भागीदारी
निभाने में सुधा
मोदी को महारत
हासिल है। बिहार
के दरभंगा में
स्व. पुरूषोत्तम दारूका
के घर में जन्मीं सुधा
मोदी ने दरभंगा
विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र
विषय की उपाधि
हासिल की।

वर्ष
1982 में सुधा मोदी
गोरखपुर निवासी अशोक
कुमार मोदी के साथ दाम्पत्य
गठबंधन में बंध गईं। मधुर
व्यवहार के कारण सुधा जल्द
ही ससुराल में
सास-ससुर से लेकर सभी
के दिलों की
सरताज बन गईं। सभी का
सहयोग मिला तो मानों जैसे
सुधा की उड़ान को पंख
मिल गए हों। चूंकि बचपन
से ही कविता,
भजन लेखन का शौक रहा
साथ ही बिजनेस
में भी रूचि थी।
ससुराल
के साथ ही पति अशोक
मोदी ने भी सुधा के
सपनों को साकार
करने में उनका
मनोबल बढ़ाते हुए
बलदेव प्लाजा में
सजावट नामक एक शाप खोली।
इस प्रतिष्ठान से
उन्होंने दो दशकों
तक महिला उद्यमिता
का ऐसा उदाहरण
प्रस्तुत किया, जिसे
देखकर गोरखपुर की
युवा बेटियों ने
भी सपनों के
पंख फैलाने शुरू
कर दिए।
इसी
बीच इनका
जुड़ाव अग्रवाल महिला
मंडल में बतौर
संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उन्होंने
स्त्रियों में आत्मविश्वास
और सामुदायिक नेतृत्व
की ऐसी अलख जगाई कि
उनका नाम गोरखपुर
की नारी शक्ति
का आधार स्तंभ
बन गया। सर्वोदय
मंडल अध्यक्ष के
रूप में भी इनके कार्य
खूब सराहे गए।
इनका जातिवादिता पर
फोकस नहीं रहा।
सामाजिक कार्यों के
चलते इन्होंने नई
दिशा फाउंडेशन की
स्थापना की। इनके
दो सुपुत्र भी
अपनी मां के पदचिंहों पर कंधे से कंधा
मिलाकर चल रहे हैं। इनके
बड़े सुपुत्र सुधांशु
मोदी एमबीए कर
दुबई व अफ्रीका
में बिजनेस कर
रहे हैं। जबकि
छोटे सुपुत्र हिमांशुु
मोदी व्यवसाय में
कैरियर में नित नए आयाम
स्थापित कर रहे हैं।

ऐसी बदली जीवन
की धारा
1998 की बाढ़ विभिषिका
देख द्रवित हुई
सुधा मोदी ने अपनी जिंदगी
की धारा को समाजसेवा की तरफ ऐसा मोड़
लिया कि आज इनके कार्यों
की बदौलत इनकी
खास पहचान बनी
हुई है। रूरल
न्यूज नेटवर्क से
हुई खास बातचीत
के दौरान सुधा
मोदी ने बताया
कि वर्ष 1998 की
बाढ़ में बंधे
पर मेरा जाना
हुआ और वहां परिवारों की बदहाली
से मेरा सीधा
साक्षात्कार हुआ। चूंकि
श्रीमती मोदी अग्रवाल
महिला समिति की
संस्थापक अध्यक्ष रही तो बच्चों को
किताब, कापियां, स्कूली
बैग दे दिया गया। बच्चों
का पढ़ाई से नाता जोड़ने
के लिए भावनात्मक
लगाव का होना जरूरी था,
इसलिए उन्होंने सप्ताह
में दो, तीन दिन बच्चों
के पास जाकर
उन्हें खाना, मिठाई,
चाकलेट इत्यादि देना
प्रारंभ किया। इस
पद्धति के अपनाने
का फायदा यह
हुआ कि सुधा का बच्चों
से सीधा लगाव
हो गया।
अब बच्चे खुलकर
उनसे अपनी समस्याएं
और जिज्ञासा व्यक्त
करने लगे। इन्होंने
नई दिशा फाउंडेशन
की बतौर संस्थापक
सामाजिक कार्य करने
शुरू कर दिए। धीरे-धीरे
यह बच्चे बड़े
हुए तो एक बच्ची के
पिता की मृत्यु
हो गई और उसकी मां
जो दूसरों के
घरों में बर्तन
मांजकर किसी तरह
बच्ची की शादी की तैयारियां
कर रही थी। सुधा ने
जब शादी के बारे में
जानकारी की तो मानों पैरों
तले जमीन खिसक
गई हो, मात्र
चार-पांच नए बर्तन और
गठरी में बंधे
कुछ नए कपड़ों
के अलावा इस
परिवार में कुछ नहीं था।
सुधा बतातीं हैं
कि इस घटना ने हमें
इतना झकझोर दिया
कि मैंने इस
बच्ची की शादी का जिम्मा
लिया। यथासंभव स्वयं
और कुछ लोगों
के सहयोग से
हिंदू रीति रिवाज
के अनुसार शादी
कराकर कन्यादान भी
मैंने खुद किया।
इसके बाद यह सिलसिला प्रत्येक वर्ष
करना शुरू किया।
पहले वर्ष में
पांच, दूसरे वर्ष
में 14, तीसरे वर्ष
में 16, चैथे वर्ष
में 20 शादियों का
लक्ष्य बनाकर उसे
मूर्त रूप दिया।
सुधा नम आंखों
से बतातीं हैं
कि इस मिशन में मेरे
परिवार द्वारा मिले
सहयोग को मैं आजीवन नहीं
भुला पाऊंगी। इसी
मिले हौसले की
बदौलत आज मैं इस मुकाम
पर पहुंच सकी
हूं कि वर्ष
2026 में 51 गरीब कन्याओं
के विवाह का
लक्ष्य बना सकीं
हूं। सुधा के पास गरीब
कन्याओं की शादियों
के लिए लोग आते हैं
और सर्वे कार्य
के माध्यम से
भी ऐसी बेटियों
की तलाश कर उनकी वास्तुस्थिति
से रूबरू होती
हैं। अब तो पति के
अलावा दोनों बेटे
भी इस योग्य
हो गए हैं, जो अपनी
मां के सपनों
को अमली जामा
पहनाने में भरपूर
सहयोग कर रहे हैं।
एक
लड़की के विवाह
में करीब 70 से
80 हजार का खर्चा
आता है। हर विवाह में
दुल्हन का श्रंगार,
दूल्हे के कपडे,
बिस्तर, फर्नीचर समेत
अन्य सामान भी
यह खुद अपने
हाथों से देती हैं।
महानगर की इन
शख्सियतों ने सराहा
सुधा मोदी के
सामाजिक कार्यों को
पूर्व विधायक राधामोहन
अग्रवाल, वर्तमान सांसद रवि
किशन, मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ द्वारा खूब
सराहना मिली।
सुधा
मोदी का कहना है कि
मेरी सोच है कि केवल
एक सुधा मोदी
से काम नहीं
चलेगा, बल्कि मेरा
यह प्रयास है
कि समाज में
मेरी तरह तमाम
महिलाएं मेरे इस मिशन को
आगे बढ़ाएं, तभी
जीवन की सार्थकता
होगी। बता दें कि सुधा
मोदी सेवा भारती,
संस्कार भारती और
विश्वहिंदू परिषद तक
हर मंच पर परिवर्तन की शक्ति
बनकर उभरती रही
हैं।