आर्मी मैन और जरूरतमदों के लिए फ्री ऑटो सर्विस, सनी ने पेश की मानवता की मिसाल, 24 घंटे देते सेवा
रूरल न्यूज नेटवर्क।गोरखपुर के रहने वाले सनी इंसानियत और सेवा का एक ऐसा मिसाल
पेश कर रहे हैं, जो तरीफ के काबिल है। सनी एक ऑटो ड्राइवर हैं।
वे आर्मी, मरीज और किसी भी जरूरतमंद को फ्री में छोड़ते
हैं।उनका यह सेवाकार्य 24 घंटे चलता है। सनी का कहना है कि 12 बजे रात में भी अगर कोई इमर्जेंसी में कॉल करता है तो मैं
तुरंत रेडी होकर उन्हें जहां भी वे कहते हैं छोड़ देता हूं। यह फ्री सर्विस वे
पिछले आठ वर्षों से दे रहे हैं।
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एक बूढ़ी दादी
ने दिया था सलाह
सनी ने बताया
कि इस काम के लिए एक बूढ़ी दादी ने उन्हें सलाह दिया था। तभी से वे फ्री ऑटो सर्विस
देते हैं। यह काम वे पिछले 8 साल से
निःस्वार्थ भाव से कर रहे हैं।सनी बताते हैं
कि जब वे बहुत छोटे थे तभी से ही उनका मन लोगों की मदद करने में लगता था। ऐसा करने
से उन्हें एक अलग ही खुशी होती थी। वहीं बचपन से ही आर्मी वालों के लिए उनके मन
में सम्मान और प्यार है। इसलिए उनके लिए कुछ अच्छा करना चाहते थे।
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जब वे 20 साल के हुए तब परिवार की मदद से ऑटो लिया। ऑटो खरीदने के एक
ही दिन बाद उनके मोहल्ले की बूढ़ी दादी की अचानक तबियत बिगड़ गई। देर रात कोई सहारा
न मिलने के बाद सनी उन्हें अपने ऑटो से फ्री में हॉस्पिटल लेकर गए।
इस पर वह दादी बहुत खुश
हुई। उन्होंने सनी को सलाह दिया कि बेटा तुम बहुत अच्छा काम किए हो। ऐसे ही हमेशा
करना। हर जरूरतमंद की निःश्वासर्थ भाव से सेवा करना। कभी रुपयों पर मत जाना। तुम
बहुत आगे जाओगे।
सनी ने बताया कि वह दादी
बहुत बीमार थी और एक दिन तक एडमिट होने के बाद ही उन्होंने दम तोड़ दिया। लेकिन
उनकी बात मेरे जहन में बैठ गई। तबसे ही मैंने यह सोच लिया कि अब मेरी यह गाड़ी
सामाजिक सेवा के लिए ही समर्पित रहेगी।सनी का कहना है
कि मैं 24 घंटे में सिर्फ दो घंटे ही
आराम करता हूं। उस समय फोन ऑफ करके सो जाता क्योंकि सोना भी बहुत जरुरी है। उसके
बाद हर समय सेवा कार्य के लिए तैयार रहता हूं।
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मंडी में सब्जियां ढोकर
करते थोड़ी कमाई
उन्होंने बताया कि सुबह के
समय अगर मैं फ्री रहता हूं। सेवा के लिए कोई फोन नहीं आया रहता है। उस समय मंडी
जाकर ऑटो से कुछ राउंड सब्जियां पहुंचा देता हूं, जिससे थोड़ी
बहुत कमाई हो जाती है। इसी से ऑटो का CNG और अन्य
मेंटेनेंस देखता हूं।
मन को मिलता सुकून
सनी का कहना है
कि सेवाकार्य करके एक अलग ही अनुभव मिलता है। सुकून महसूस होता है। जब किसी
जरूरतमंद मरीज को हॉस्पिटल पहुंचाता हूं तो ऐसा लगता है कि काश मेरे पास इतना
सामर्थ रहता कि उनकी और मदद कर पाता।
सनी ने बताया कि मैं बहुत
ही सामान्य परिवार से आता हूं। आठ साल पहले रोजी- रोटी के लिए लोन पर यह ऑटो खरीदा
था। तीन वर्षों में लोन चुकाया। उन्होंने बताया कि इस गाड़ी को खरीदने में मेरी
दादी ने मदद की थी।
बचपन में ही
छूटा माता-पिता का साथ
सनी के माता और पिता उनके
बचपन में ही गुजर गए थे। उन्होंने उनका चेहरा तक नहीं देखा है। परिवार में चाचा-
चाची और दादी रहती हैं। चाचा पूजा- पाठ का काम करते हैं। आर्थिक तंगी और गरीबी के
बीच सनी केवल 5वीं तक ही पढ़ाई कर पाए हैं।
ऑटो पर लिखवाया
'आर्मी सेवा निःशुल्क'
पिछले आठ वर्षों की इस सेवा
कार्य में सनी अबतक हजारों जरुरतमंदो की मदद कर चुके हैं। रास्ते में फंसे राहगीर
से लेकर घर पर पड़ें पेशेंट, आर्मी और पुलिस
वालों के लिए हमेशा खड़े रहते हैं।उनका यह ऑटो
पूरी तरह सेवाकार्य के लिए समर्पित है।
देश के जवानों के प्रति
सम्मान और प्यार को दर्शाते हुए उन्होंने अपनी गाड़ी के आगे 'आर्मी सेवा निःशुल्क' का बोर्ड भी
लगवाया है। उसके साथ ही मोबाइल नंबर भी लिखा है।
सनीका सेवाकार्य शहर भर में उनकी पहचान बन गयी है। इस
काम के लिए ट्रैफिक पुलिस ने उन्हें माला पहना कर सम्मानित भी किया है और हमेशा
तारीफ करते हैं। उनके कार्यों की सराहना हर कोई कर रहा है।