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• gorakhpur, cm yogi, cold day, BRD, hospital • गोरखपुर / चरगांवा • 24-01-2026

BRD में पकड़ी गई संदिग्ध बोलेरो, मरीजों को बहलाकर ले जा रहे थे प्राइवेट अस्पताल, किया चालान

रूरल न्यूज नेटवर्क।गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर में गुरुवार शाम मरीजों को निजी अस्पताल भेजने की दलाली का मामला फिर उजागर हुआ। मेडिकल कॉलेज के 500 बेड अस्पताल परिसर में खड़ी बोलेरो को सुरक्षा कर्मियों ने रोका। पूछताछ में चालक संतोषजनक जवाब नहीं दे सका, जिस पर मेडिकल चौकी पुलिस को बुलाया गया।

दरअसल, बोलेरो चालक काफी देर तक परिसर में चक्कर काटता दिखा और मरीजों व उनके तीमारदारों पर नजर रखे हुए था। दलाली की शिकायतें पहले भी आने के कारण सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को सामान्य नहीं माना। बातचीत के दौरान चालक उल्टा बहस करने लगा, जिसके बाद पुलिस हस्तक्षेप जरूरी हो गया।

चालक की पहचान और कानूनी कार्रवाई

पुलिस पूछताछ में आरोपी की पहचान गुलरिहा थाना क्षेत्र के जंगल एकल नंबर दो, टोला पिडारा के रहने वाले अमित चौहान के रूप में हुई। पुलिस ने बोलेरो को सीज किया और चालक के खिलाफ शांतिभंग में चालान किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार परिसर और प्रवेश द्वार पर निगरानी को और बढ़ाया गया है।

मरीजों को फुसलाने की कोशिश

बीआरडी परिसर में कई वर्षों से प्राइवेट अस्पतालों के लिए मरीजों की दलाली के मामले सामने आए हैं। शिकायतों के अनुसार दलाल तीमारदारों को ‘बेहतर डॉक्टर’, ‘तुरंत भर्ती’, ‘प्राइवेसी’, ‘तेज जांच’ और ‘सुविधा’ का हवाला देकर प्राइवेट अस्पताल भेजने की कोशिश करते हैं। अधिकतर मामलों में भर्ती होने पर अस्पताल से दलाल को कमीशन मिलता है।

बीआरडी पूर्वी यूपी और पड़ोसी जिलों के लिए बड़ा रेफरल सेंटर है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में गंभीर मरीज पहुंचते हैं। ग्रामीण या बाहरी जिलों से आने वाले तीमारदार मेडिकल प्रक्रियाओं से कम परिचित होते हैं। दलाली नेटवर्क मुख्य रूप से इसी अनजानगी और चिंता के बीच सक्रिय रहता है।

कानूनी खिड़की का फायदा उठाते हैं दलाल

सुरक्षा कर्मियों के अनुसार गाड़ियों की जांच, पूछताछ और नंबर नोटिंग की व्यवस्था है, परंतु तीमारदार स्वेच्छा से बाहर जाना चाहे तो उन्हें रोका नहीं जा सकता। दलाल इसी कानूनी खिड़की का उपयोग करते हैं। बाहर प्राइवेट अस्पताल पहले से तैयार रहते हैं। कई बार दलाल सीधे अस्पताल काउंटर तक पहुंच जाते हैं और भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ा दी जाती है।

सितंबर 2025 में हुई थी कार्रवाई इससे पहले सितंबर 2025 में बीआरडी परिसर से पांच एंबुलेंस सीज की गई थीं। उस दौरान एसपी सिटी अभिनव त्यागी स्वयं मौके पर पहुंचे थे। उस कार्रवाई के बाद भी दलाली नेटवर्क के पूरी तरह खत्म होने के संकेत नहीं मिले। शिकायतों का पैटर्न वही रहा- बिना नाम की एंबुलेंस, अस्पष्ट जानकारी और बेहतर इलाज का हवाला।

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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ओपीडी, इमरजेंसी और भर्ती मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण यह नेटवर्क निजी अस्पतालों के लिए सक्रिय बाजार की तरह है। गंभीर मरीजों के मामलों में भर्ती और बिल बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है, इसलिए दलाली की रकम भी अधिक होती है।

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