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Friday, 22nd May, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। महायोगी गुरु
गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय में गुरुवार को स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम आयोजित किया
गया। इस दौरान 6 माह से 16 वर्ष तक के कुल
60 बच्चों को स्वर्ण प्राशन की औषधि दी गई।
यह कार्यक्रम कुलपति डॉ.
के. रामचंद्र रेड्डी के निर्देश पर विश्वविद्यालय में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक
डॉ. लक्ष्मी अग्निहोत्री की देखरेख में संपन्न हुआ। डॉ. अग्निहोत्री ने बताया कि
स्वर्ण प्राशन के लिए आवश्यक औषधीय सामग्री इमामी कंपनी (झंडू) द्वारा उपलब्ध कराई
जाती है।
यह कार्यक्रम 27 जून से प्रत्येक माह पुष्य नक्षत्र पर नियमित रूप से आयोजित
किया जा रहा है। अब तक लगभग 700 से अधिक बच्चे
इन स्वर्ण प्राशन कार्यक्रमों से लाभान्वित हो चुके हैं।
स्वर्ण प्राशन एक
आयुर्वेदिक औषधि है, जो जन्म से 16 वर्ष तक के बच्चों को हर माह पुष्य नक्षत्र के दिन दी जाती
है। यह औषधि शुद्ध स्वर्ण, गोघृत, शहद, ब्राह्मी, वचा और शंखपुष्पी जैसी औषधियों से तैयार की जाती है।
यह औषधि बच्चों की रोग
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है। साथ ही, यह उनकी
बौद्धिक क्षमता, याददाश्त और समझने की शक्ति को विकसित करती है।
स्वर्ण प्राशन बच्चों को सर्दी-जुकाम, एलर्जी और
मौसमी बीमारियों से बचाने के साथ-साथ पाचन क्रिया को भी सुधारता है।